मुख्य सचिव ने सेब महोत्सव 3.0 का किया शुभारम्भ, कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग और बाजार पर जोर

 


देहरादून, 08 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने गुरुवार को यहां आईटी पार्क स्थित नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘सेब महोत्सव-3.0’ का शुभारम्भ किया। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को मजबूत, आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने के लिए नाबार्ड व राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने महोत्सव में प्रदर्शित सेब की विभिन्न प्रजातियों, कीवी, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों और एफपीओ प्रतिनिधियों से उत्पादों की गुणवत्ता, विपणन व्यवस्था और उनकी समस्याओं की जानकारी भी ली।

उन्होंने कहा कि एफपीओ का उद्देश्य केवल किसानों को एक मंच पर लाना नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत और टिकाऊ संस्थाओं के रूप में विकसित करना होना चाहिए। इसके लिए निरंतर प्रशिक्षण, क्षमता विकास, मार्गदर्शन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने कृषि एवं बागवानी उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के साथ खरीद, विपणन और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार कर उन्हें उचित बाजार और बेहतर मूल्य से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास करने को कहा।

मुख्य सचिव ने किसानों के उत्पादों के सुरक्षित भंडारण और उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए शीत भंडारण सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने उत्पादों की जानकारी और गुणवत्ता संबंधी विवरण उपलब्ध कराने के लिए ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था विकसित करने तथा जैविक उत्पादों के प्रमाणन की प्रक्रिया को बढ़ावा देने की बात कही।

उन्होंने कहा कि एफपीओ को मजबूत बनाने के लिए नाबार्ड और राज्य सरकार की योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उपलब्ध योजनाओं और संसाधनों को आपस में जोड़कर अधिक से अधिक लाभ किसानों तक पहुंचाया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार, नाबार्ड, संबंधित विभागों, एफपीओ, किसानों और अन्य हितधारकों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से उत्तराखंड के कृषि और बागवानी उत्पादों के लिए बेहतर बाजार विकसित करने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि की जा सकती है।

नाबार्ड की ओर से आयोजित महोत्सव में हर्षिल, चकराता और रामगढ़ के ए-ग्रेड सेब प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें रॉयल डिलीशियस, गोल्डन डिलीशियस, गाला और रेड डिलीशियस प्रमुख हैं। कपकोट और रामगढ़ के एफपीओ की ओर से प्राकृतिक विधि से उत्पादित कीवी भी उपलब्ध है।

महोत्सव में ताजी सब्जियों के अलावा देशी घी, जैविक सरसों तेल, जैविक गुड़, जैविक दालें, हिमालयी शहद और अन्य प्राकृतिक उत्पाद भी बिक्री के लिए रखे गए हैं। ऐपण कला, ताम्र शिल्प, रिंगाल हस्तशिल्प और उत्तराखंड के विभिन्न जीआई उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र हैं।

नाबार्ड के अनुसार महोत्सव का उद्देश्य किसानों, जनजातीय समुदायों और एफपीओ को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ना और उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है।

इस अवसर पर सचिव डॉ. एस.एन. पाण्डेय, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव, महाप्रबंधक शशि कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय