आस्था: दिव्यांग पति को कंधों पर बैठाकर 180 किमी की कांवड़ यात्रा

 


हरिद्वार, 25 जुलाई (हि.स.)। कांवड़ यात्रा 2026 से पहले हरिद्वार में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने श्रद्धालुओं और राहगीरों का दिल जीत लिया। उत्तर प्रदेश के मोदीनगर निवासी आशा अपने दिव्यांग पति सचिन को कंधों पर बैठाकर करीब 180 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा करते हुए हरिद्वार पहुंचीं।

दोनों ने हरकी पैड़ी से गंगाजल भरने के बाद कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया और फिर अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। उनके साथ उनके दो बच्चे भी इस यात्रा में शामिल हैं।

सचिन ने बताया कि करीब 12 वर्ष पहले रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। इसके बावजूद भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था कम नहीं हुई।

पिछले वर्ष उनकी इच्छा पर पत्नी आशा ने उन्हें कंधों पर बैठाकर पहली बार कांवड़ यात्रा कराई थी और इस वर्ष भी वही संकल्प दोहराया।

आशा ने कहा कि पति की सेवा और साथ निभाना उनका कर्तव्य है। उन्होंने समाज में पारिवारिक मूल्यों और मर्यादा को बनाए रखने का संदेश देते हुए महिलाओं से रिश्तों को सम्मान देने की अपील की।

सचिन ने अपनी पत्नी के त्याग और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि पत्नी के साथ होने से उन्हें कभी अपनी दिव्यांगता का एहसास नहीं होता। उन्हें विश्वास है कि भगवान शिव के आशीर्वाद से एक दिन वह स्वस्थ होंगे।

यह दंपति प्रेम, विश्वास और समर्पण की ऐसी मिसाल बन गया है, जिसे देखने के लिए रास्ते में लोग रुक रहे हैं, उनका उत्साहवर्धन कर रहे हैं और उनकी सफल यात्रा की कामना कर रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला