कुंभ 2027 से पहले हरिद्वार में ‘हाथी सुरक्षा कवच’

 


हरिद्वार, 20 अप्रैल (हि.स.)। कुंभ मेला 2027 को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए हरिद्वार में जंगली हाथियों की बढ़ती आवाजाही पर नियंत्रण हेतु वन विभाग ने बहुस्तरीय सुरक्षा योजना तैयार की है। शासन ने एलीफेंट प्रूफ ट्रेंच (हाथी रोधी खाई) के निर्माण के लिए 2.37 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है, जबकि सोलर फेंसिंग और एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम भी इस योजना का हिस्सा होंगे।

8.5 किमी ट्रेंच और सोलर फेंसिंग से बनेगी सुरक्षा दीवार

वन विभाग के अनुसार, हाथियों की मूवमेंट रोकने के लिए 8.5 किलोमीटर लंबी ट्रेंच बनाई जाएगी, जो एक मजबूत बाधा के रूप में कार्य करेगी। इसके समानांतर लगभग 51 लाख रुपये की लागत से सोलर फेंसिंग भी स्थापित की जाएगी। दोनों परियोजनाओं पर कुल करीब 2.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

संवेदनशील इलाकों में बढ़ी निगरानी

भूपतवाला, खड़खड़ी, जगजीतपुर, मिस्सरपुर, कनखल और बैरागी कैंप जैसे क्षेत्र लंबे समय से हाथियों की गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं। गंगा किनारे और जंगल से सटे होने के कारण ये इलाके अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं, जहां अक्सर हाथियों के झुंड आबादी में घुसकर नुकसान पहुंचाते हैं।

एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम

वन विभाग 'अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर एलीफेंट' परियोजना के तहत करीब 50 चिन्हित स्थानों पर एआई आधारित स्मार्ट कैमरे लगाएगा। जैसे ही कैमरे हाथियों की गतिविधि दर्ज करेंगे, तत्काल अलर्ट संबंधित मोबाइल ऐप पर भेजा जाएगा। इस प्रणाली के लिए लगभग 1.5 करोड़ रुपये का अलग बजट प्रस्तावित है।

पेट्रोलिंग ट्रैक से त्वरित कार्रवाई संभव

जंगल और शहरी सीमा के बीच 1 से 2 किलोमीटर लंबा पेट्रोलिंग ट्रैक भी विकसित किया जाएगा, जिस पर लगभग 40 लाख रुपये खर्च होंगे। इससे वनकर्मियों की आवाजाही तेज होगी और आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सकेगी।

बैरागी कैंप, जहां कुंभ मेले के दौरान साधु-संतों के शिविर लगते हैं, सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। यहां ट्रेंच और फेंसिंग निर्माण कार्य को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि मेले के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य मॉनसून के बाद शुरू किया जाएगा और लक्ष्य है कि कुंभ 2027 से पहले सभी परियोजनाएं पूरी कर ली जाएं।

डीएफओ हरिद्वार स्वप्निल कुमार ने कहा कि यह योजना न केवल कुंभ मेले की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि लंबे समय से जारी मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला