हरिहर बांके बिहारी मंदिर में लाखों के गबन का आराेप, मुकदमा

 


हरिद्वार, 14 अगस्त (हि.स.)। ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र के नया हरिद्वार कॉलोनी स्थित हरिहर बांके बिहारी मंदिर की प्रबंधन व्यवस्था और मंदिर के नाम पर एकत्र की जा रही धनराशि को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता सुधाकर सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर न्यायालय के आदेश पर ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

शिकायतकर्ता ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि नया हरिद्वार वेलफेयर सोसायटी का पंजीकरण पांच वर्ष की अवधि के लिए 17 नवंबर 2014 से 16 नवंबर 2019 तक हुआ था। आरोप है कि 16 नवंबर 2019 के बाद न तो सोसायटी का चुनाव कराया गया और न ही उसका नवीनीकरण हुआ। इसके बावजूद कुछ लोगों ने आपस में साठगांठ कर स्वयं को सोसायटी का पदाधिकारी बताते हुए नया हरिद्वार कॉलोनी स्थित हरिहर बांके बिहारी मंदिर का प्रबंधन अपने हाथों में ले लिया।

खुद को पदाधिकारी बताकर मंदिर प्रबंधन संभालने का आरोप

सुधाकर सिंह का कहना है कि वह पिछले करीब 50 वर्षों से नया हरिद्वार कॉलोनी में रह रहे हैं। पिछले दो-तीन वर्षों से मंदिर आने के दौरान उन्हें कथित तौर पर जानकारी हुई कि एक व्यक्ति स्वयं को अध्यक्ष, दूसरा महामंत्री, तीसरा उपाध्यक्ष और चौथा कोषाध्यक्ष बताकर मंदिर की व्यवस्थाएं संचालित कर रहा है।

शिकायतकर्ता के अनुसार वह अपनी सामर्थ्य के अनुसार मंदिर में दान करते थे। इसके अलावा पिछले करीब एक वर्ष से मंदिर के रखरखाव और विभिन्न आयोजनों के लिए हर माह 500 रुपये भी दिए जा रहे थे। आरोप है कि 18 नवंबर 2025 को जब उन्होंने सोसायटी के पंजीकरण और मंदिर से प्राप्त होने वाली धनराशि का हिसाब-किताब मांगा तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

करीब 150 लोगों से हर माह 500 रुपये लेने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मंदिर और ईश्वर के नाम पर नया हरिद्वार कॉलोनी के करीब 150 लोगों से कथित तौर पर 500 रुपये प्रतिमाह लिए जा रहे थे। इससे करीब 75 से 80 हजार रुपये प्रतिमाह एकत्र होने का दावा किया गया है। इसके अलावा मंदिर की दान पेटियों से करीब 25 हजार रुपये प्रतिमाह प्राप्त होने का भी आरोप लगाया गया है।

इस तरह शिकायतकर्ता ने करीब एक लाख रुपये प्रतिमाह की धनराशि एकत्र किए जाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि के बावजूद उनसे और अन्य लोगों से धनराशि के उपयोग का स्पष्ट हिसाब उपलब्ध नहीं कराया गया।

2019 के बाद सोसायटी के अस्तित्व पर सवाल

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जानकारी जुटाने पर उन्हें पता चला कि नया हरिद्वार वेलफेयर सोसायटी 16 नवंबर 2019 के बाद अस्तित्व में नहीं रही। इसके बावजूद सोसायटी के नाम पर धनराशि एकत्र की जाती रही। उन्होंने 7 अप्रैल को लिखित रूप से हिसाब-किताब और धनराशि के संबंध में जानकारी मांगी, लेकिन आरोप है कि उन्हें कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता के मुताबिक जांच के दौरान उन्हें सोसायटी के नाम से पूर्व में आंध्रा बैंक में खोले गए एक खाते की जानकारी मिली, जो वर्ष 2019 के बाद निष्क्रिय बताया गया।

महाराष्ट्र बैंक के खाते में रकम जमा करने का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इसके बाद मंदिर और ईश्वर के नाम पर एकत्र की जा रही रकम को महामंत्री के सहयोग से महाराष्ट्र बैंक, हरिद्वार में एक अन्य खाते के माध्यम से जमा कराया गया। आरोप है कि इस खाते में करीब 16 लाख रुपये जमा किए गए और चारों आरोपियों ने आपसी साठगांठ कर कथित रूप से उस धनराशि का गबन कर लिया। इसके साथ ही मंदिर की धनराशि को मनमाने तरीके से खर्च किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मंदिर से धनराशि लेने और उसका संचालन करने का आरोपियों या निष्क्रिय हो चुकी सोसायटी को कोई वैधानिक अधिकार नहीं था।

पुलिस से कार्रवाई न होने पर कोर्ट पहुंचे शिकायतकर्ता

शिकायतकर्ता के अनुसार उन्होंने मामले की जानकारी पुलिस को देकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश के बाद ज्वालापुर कोतवाली पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।

पुलिस ने शुरू की जांच

ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार, मुकदमा दर्ज होने के बाद अब सोसायटी के पंजीकरण, मंदिर प्रबंधन, बैंक खातों, जमा धनराशि और उसके खर्च से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आरोपों की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला