भारतीय संस्कृति के रंगों से सजेगा 52वां अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन
हरिद्वार, 22 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय ज्ञान-परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित 52वें अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन का काउंटडाउन शुरू हो गया है। 29 से 31 अक्टूबर तक पतंजलि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले इस त्रिदिवसीय सम्मेलन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
सम्मेलन को दिव्य और भव्य बनाने के लिए व्यवस्थागत और शैक्षणिक तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की झलक दिखाने की तैयारी जोरों पर है।
पतंजलि विश्वविद्यालय की प्रतिकुलपति साध्वी डॉ. देवप्रिया तैयारियों का निरंतर निरीक्षण कर रही हैं। उन्होंने विभिन्न समितियों के समन्वयकों से प्रगति की जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि देश-विदेश से आने वाले विद्वानों और शोधार्थियों को सुव्यवस्थित वातावरण मिल सके।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को लेकर गुरुवार को उन्होंने विद्यार्थियों और संगीत-नृत्य आचार्यों के साथ बैठक कर समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली विरासत, लोकजीवन और राष्ट्रीय एकात्मता का परिचय होने चाहिए। भारत की पहचान विविधता में एकता है, इसलिए मंच पर विभिन्न राज्यों की संगीत और नृत्य शैलियों को स्थान दिया जाए।
सम्मेलन में भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और लोककलाओं की प्रस्तुतियां होंगी, जिससे वातावरण ज्ञान, कला और आध्यात्मिक चेतना के समन्वय से सजेगा। आयोजन को लेकर विद्यार्थियों और आचार्यों में विशेष उत्साह है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला