अखाड़ा परिषद विवाद : आरोप-प्रत्यारोप के बजाय समाधान का मार्ग अपनाए

 


हरिद्वार, 28 जुलाई (हि.स.)।

हरिद्वार में अखाड़ा परिषद को लेकर जारी विवाद पर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि ने चिंता व्यक्त की है। मंगलवार को उन्होंने एक बयान में कहा कि अखाड़े सनातन धर्म की शोभा हैं और संतों के बीच इस प्रकार का विवाद उचित नहीं है। उनका कहना है कि दोनों पक्षों को आपसी संवाद और वार्ता के माध्यम से मतभेद दूर करने चाहिए, क्योंकि लगातार हो रहे आरोप-प्रत्यारोप से समाज में गलत संदेश जा रहा है।

गौरतलब है कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में बीते कई वर्षों से दो फाड़ हो गया है। संयोग से दोनों गुटों के अध्यक्ष का नाम श्रीमहंत रविन्द्र पुरी ही है। कुल मिलाकर 13 अखाड़े हैं, जिनमें से 8 अखाड़ों के समर्थन का दावा श्रीमहंत रविन्द्र पुरी (सचिव महानिर्वाणी अखाड़ा) करते हैं। जबकि श्रीमहंतरविन्द्र पुरी (सचिव,निरंजनी अखाड़ा) स्वयं को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष मानते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला