एआई के दौर में डेमोक्रेसी पर महामंथन, देसंविवि में जुटे देश-विदेश के विशेषज्ञ

 




हरिद्वार, 15 सितंबर (हि.स.)। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में मंगलवार को ‘एआई फॉर डेमोक्रेसी’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय समिट आयोजित किया गया। समिट में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव, संभावनाओं, चुनौतियों और इसके जिम्मेदार उपयोग पर विचार-विमर्श किया।

समिट की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही है। एआई को मानव बुद्धि का विकल्प बनाने के बजाय मानव क्षमता के विस्तार का माध्यम बनाया जाना चाहिए। मानवीय मूल्यों से जुड़ा एआई लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, समावेशी और जनकेंद्रित बना सकता है।

लंदन स्थित सेंटर फॉर टुमॉरो के संस्थापक अध्यक्ष डेक्स हंटर-टोरिक ने कहा कि एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए तकनीकी विकास के साथ सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर भी ध्यान देना जरूरी है। सरकार, उद्योग और समुदाय को मिलकर ऐसी तैयारी करनी चाहिए, जिससे एआई समान अवसर, मानव कल्याण और समावेशी विकास का आधार बन सके।

समिट में विशेषज्ञों ने एआई, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सार्वजनिक नीति, नागरिक भागीदारी, डिजिटल विश्वसनीयता और भविष्य की शासन व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए। इस दौरान एआई फॉर डेमोक्रेसी विषय पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। एआई आधारित पत्रिका समेत कई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम में द ब्रिटिश यूनिवर्सिटी इन इजिप्ट के डीन प्रो. इब्राहिम सलामा, एआई एवं सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ डेक्स हंटर-टोरिक, ब्रिटिश हाई कमीशन नई दिल्ली के प्रमुख-टेक पॉलिसी हैरी फिशर, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. विजय धस्माना, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, मनु गौड़ समेत देश-विदेश के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला