बुग्यालों के अस्तित्व पर खतरा मंडराना हिमालय के अशुभ संकेत
नई टिहरी, 08 सितंबर (हि.स.)। बुग्याल बचाओ संकल्प यात्रा का भिलंगना के दूरस्थ घुत्तू क्षेत्र में समापन हो गया। इस दौरान दल के लोगों ने ग्रामीणों के साथ हिमालय के बुग्यालों पर मंडराते खतरे पर चिंतन गोष्ठियां की। उन्होंने इको सिस्टम बरकरार रखने के लिए बुग्यालों को बचाने की अपील की।
चंडी प्रसाद भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र गोपेश्वर के एक दल ने पांच दिवसीय यात्रा निकाल कर रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण होते हुए भिलंगना के घुत्तू तक बुग्यालों का अध्ययन किया। घुत्तू में आयोजित गोष्ठी में दल से जुड़े व्योमेश जुगरान ने बताया कि बुग्याल बचाओ अभियान की शुरुआत रुद्रप्रयाग जिले के फाटा गांव से शुरू हुई। रामपुर न्यालसू, जीआईसी फाटा के छात्र-छात्राओं और त्रियुगीनारायण में ग्रामीणों के साथ हिमालयी बुग्यालों पर मंडराते खतरे के बारे में बताया गया।
दल के सदस्य विनय सेमवाल ने कहा सीपी भट्ट और विकास केंद्र 2014 से बुग्यालों के संरक्षण के लिए अभियान चला रहे हैं। कहा कि बुग्यालों पर सर्वप्रथम अधिकार वहां की वनस्पतियों का है। उसके बाद वन्य जीवों, भेड़ पालकों और स्थानीय ग्रामीणों का है। जिला पंचायत सदस्य विजय लाल ने कहा कि बुग्याल हमारी प्रकृति धरोहर है, इन्हें बचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।
ओम प्रकाश भट्ट ने पंवाली बुग्याल में हो रहे भू-धसाव पर चिंता जताई। कहा इसे रोकने के लिए कारगर उपाय करने होंगे। बुग्यालों के अस्तित्व पर खतरा मंडराना हिमालय के शुभ संकेत नहीं है। मोहन पंत ने बुग्यालों में ट्रैकिंग के दौरान पर्यटकों द्वारा वहां छोड़े गए पॉलीथिन व अन्य प्लास्टिक के कचरे चिंता जताई। कहा कि बुग्यालों की क्षमता के मुताबिक सीमित संख्या में ट्रैकिंग की अनुमति दी जानी चाहिए।
इस मौके पर सुशील भट्ट, वन दरोगा मंगल सिंह गुसाईं, संदीप राणा, शिव सिंह राणा, क्षेत्र पंचायत सदस्य रतनमणी भट्ट, नित्यानंद कोठियाल, अक्षित रावत, राजेंद्र सिंह चौहान, परमवीर रावत, प्रेम सिंह राणा, अरविंद, सुरजीत चौहान आदि मौजूद थे।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी