शिक्षकों को लोकगीत, लोकवाद्य, ताल-लय और समूहगान का दिया प्रशिक्षण

 


उत्तरकाशी, 21 सितंबर (हि.स.)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान बड़कोट, उत्तरकाशी में 17 से 21 सितंबर तक आयोजित पांच दिवसीय संगीत कौशल विकास कार्यशाला का समापन हो गया है।

कार्यशाला का उद्घाटन डायट के प्राचार्य संजीव जोशी ने किया। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की दृष्टि में संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह बच्चों में सीखने, सृजनात्मकता, अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक जुड़ाव और आत्मविश्वास विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने विद्यालयी शिक्षा में संगीत एवं कला को अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने पर जोर दिया।

कार्यशाला की समन्वयक सुषमा महर ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा-2023 तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में संगीत एवं कला की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कक्षा छह के लिए कला विषय की नई पाठ्यपुस्तक ‘कृति’ विकसित की गई है। कार्यशाला में संगीत विशेषज्ञ रवि कमल त्रिवेदी एवं रूबी गौतम सारस्वत ने शिक्षकों को पुस्तक की विषयवस्तु एवं उसके शिक्षण संबंधी पहलुओं का अभिमुखीकरण कराया।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी शिक्षकों को विद्यालय की प्रार्थना सभा को अधिक रुचिकर एवं सुरमई बनाने के लिए नवीन प्रार्थनाओं और समूहगान का लयबद्ध प्रशिक्षण दिया गया।

इसके साथ ही उत्तराखंड के लोकगीतों एवं स्थानीय संगीत, ताल एवं लय आधारित गतिविधियों तथा स्थानीय लोकवाद्यों की जानकारी दी गई।

मुख्य संदर्भदाताओं ने संगीत एवं कला को अन्य विषयों के साथ जोड़कर शिक्षण को रुचिकर एवं प्रभावी बनाने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की। साथ ही विद्यार्थियों में संगीत से जुड़े ज्ञान, कौशल, रचनात्मकता और आत्मविश्वास को विकसित करने के व्यावहारिक उपायों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।

शिक्षकों को गायन, वादन और तालबद्धता का व्यवहारिक अभ्यास कराया गया।

कार्यशाला में सुषमा महर, अरशद अंसारी, संगीता रावत, सुशील जोशी, शशिभूषण नौटियाल, वैशाली रावत सहित विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र नौटियाल