ज्योलीकोट में टैंकरों से शुद्ध पेयजल आपूर्ति

 


नैनीताल, 11 सितंबर (हि.स.)। नैनीताल जनपद मुख्यालय के निकटवर्ती ज्योलीकोट एवं आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए शुक्रवार को भी उत्तराखंड जल संस्थान की ओर से टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति जारी रही। साथ ही जल संस्थान और पेयजल निगम के अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों के साथ विभिन्न पेयजल टैंकों, जल स्रोतों और पाइपलाइनों का निरीक्षण किया।

टैंकों की सफाई, क्लोरीनीकरण, फ्लैशिंग और मरम्मत का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में कम से कम दो लोगों की मौत दूषित जल जनित बीमारियों के कारण हो चुकी है। इस बीच जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने पेयजल विभाग को निर्देश दिए कि स्थिति सामान्य होने तक प्रतिदिन टैंकरों से शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जाए। सभी जल स्रोतों, टैंकों और वितरण लाइनों की नियमित क्लोरीनीकरण व नमूना जांच कर रिपोर्ट प्रतिदिन जिला प्रशासन को दी जाए।

पाइप लाइन लीकेज और क्रॉस-कनेक्शन की शिकायतों का तत्काल निस्तारण करने तथा स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर घर-घर सर्वे और जलजनित रोगों की निगरानी जारी रखने के निर्देश भी दिए। बताया गया है कि विगत दो दिनों में चार टैंकरों से 110 परिवारों को 15,500 लीटर से अधिक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया है। देवलदुंगा लाइन की 500 मीटर फ्लैशिंग कराई गई, 14 शिकायतों का निस्तारण और आठ पेयजल नमूने लिए गए। ग्रामीणों को दूषित पानी से बचाव के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। डीएम ने स्पष्ट किया कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पीलिया नियंत्रण के लिए नौ सूत्रीय कार्ययोजना

इधर, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के कुमाऊं मंडल के निदेशक डॉ. केके अग्रवाल और संयुक्त निदेशक डॉ. योगेश पुरोहित ने ज्योलीकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा पीलिया प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। स्थिति की समीक्षा के बाद प्रभावित क्षेत्रों को उच्च, मध्यम और निम्न जोखिम में बांटकर निगरानी और कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में सघन निगरानी और पेयजल नमूनों की प्राथमिकता से जांच, जबकि अन्य क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी के निर्देश दिए गए। लोगों को पानी 15 मिनट तक उबालकर ठंडा करने के बाद पीने, साबुन से हाथ धोने और घरों के आसपास जलभराव नहीं होने देने के प्रति जागरूक करने को कहा गया। साथ ही सभी पीलिया रोगियों की सूची तैयार करने, नए और पुराने मरीजों का अलग अभिलेख रखने तथा सरकारी और निजी चिकित्सा इकाइयों से दैनिक सूचना आईएचआईपी-आईडीएसपी पोर्टल पर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। अस्पतालों में पीलिया की त्वरित जांच और उपचार के लिए अलग कक्ष स्थापित करने तथा आवश्यक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया।

इसके अतिरिक्त जल संस्थान के साथ समन्वय कर प्रभावित क्षेत्रों में नियमित पेयजल नमूना जांच, निर्धारित मानकों के अनुसार अत्यधिक क्लोरीनीकरण तथा स्वच्छता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए। हल्द्वानी के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में पीलिया व जलजनित रोगों की दैनिक निगरानी और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने तथा अब तक की कार्रवाई और आगे की कार्ययोजना की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी