बाबा नीब करौरी की 125वीं जयंती-30 नवंबर पर विशेष : बाबा ने नैनीताल के हनुमानगढ़ से शुरू की थी 108 हनुमान मंदिरों के निर्माण की यात्रा
नैनीताल, 29 नवंबर (हि.स.)। विश्वविख्यात आध्यात्मिक संत बाबा नीब करौरी महाराज के भक्त रविवार को उनकी 125वीं जयंती मनाने को उत्साहित हैं। इस अवसर पर बाबा जी की प्रथम साधना स्थली नैनीताल के हनुमानगढ़ धाम में भी उल्लास का माहौल है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मंडल में स्थित नैनीताल का हनुमानगढ़ धाम बाबा जी द्वारा स्थापित पहला हनुमान मंदिर स्थापित करने का पावन स्थल है जिसके बाद उन्होंने देश में 108 से अधिक हनुमान मंदिर स्थापित किये गये थे। बाबा जी की 125वीं जयंती पर यह धाम श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और दिव्य अनुभूति का केंद्र बना हुआ है।
उल्लेखनीय है कि बाबा नीब करौरी महाराज (जन्म 30 नवंबर 1900, निधन 11 सितंबर 1973) ने 16 जून 1953 को निर्जन पहाड़ी मनोरा को भक्ति, साधना और सेवा की ऊर्जा से पवित्र करते हुए यहाँ मंदिर की स्थापना की, जो आज विश्वभर के भक्तों का प्रमुख आस्था केंद्र है। कहा जाता है कि बाबा महाराज 1950 के दशक में नैनीताल पहुँचकर नगर के तल्लीताल बाजार और सड़क किनारे पैरापिटों पर कंबल ओढे़ हुए बैठते थे। नगरवासियों के आग्रह पर उन्होंने मनोरा पहाड़ी को साधना भूमि के रूप में चुना। मंदिर निर्माण की देखरेख उनके प्रिय शिष्य हरदा बाबा ने की, जो बाद में अमेरिका में बाबा हरिदास के रूप में प्रसिद्ध हुए। बाबा महाराज मंदिर के निकट स्थित अपनी कुटिया से सभी आध्यात्मिक कार्य निर्देशित करते थे।
सबसे पहले स्वयं महाराज जी ने यहां छोटी गदा वाले हनुमानजी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की, जो आज भी बड़े हनुमानजी के मंदिर के निकट विराजमान है। कहते हैं कि मंदिर के निर्माण से पूर्व यह स्थान बच्चों का कब्रिस्तान था, किंतु बाबा की कृपा और साधना से यहाँ की नकारात्मकता दिव्यता में परिवर्तित हो गई। स्थापना उपरांत एक वर्ष तक निरंतर रामायण पाठ और ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ का अखंड कीर्तन चलता रहा।
हनुमानगढ़ आज एक विस्तृत आध्यात्मिक परिसर के रूप में विकसित है, जिसमें-हनुमानजी की विशाल सीना-फाड़े मूर्ति, छोटे हनुमानजी मंदिर, बाबा नीब करौरी आश्रम, महामृत्युंजय मंदिर, बाल हनुमान मंदिर, नव निर्मित राधाकृष्ण मंदिर, श्रीराम दरबार, शिवालय तथा भरत जी की मूर्ति सहित अनेक श्रद्धा-स्थल सम्मिलित हैं। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहाँ सुंदरकाण्ड पाठ, भजन-कीर्तन और हनुमान चालीसा का नियमित आयोजन होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी