सात तालाबों में मछली पालन, सालाना तीन लाख की बचत

 

पौड़ी गढ़वाल, 25 सितंबर (हि.स.)। पाबौ विकासखंड के बिडोली गांव निवासी राजेंद्र चमोली ने मछली पालन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर ग्रामीण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। पिछले पांच वर्षों से मछली उत्पादन कर रहे राजेंद्र अब सात तालाबों में पंगास और ग्रास कार्प का उत्पादन कर रहे हैं। खास बात यह है कि उन्होंने अपने इस काम से गांव की तीन महिलाओं को भी जोड़ा है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का साधन मिला है।

मत्स्य विभाग के सहयोग से शुरू हुआ राजेंद्र का यह कारोबार अब विस्तार ले चुका है। वह वर्ष में दो से तीन बार मछली का उत्पादन कर स्थानीय बाजारों में बिक्री करते हैं। एक उत्पादन चक्र में करीब चार कुंतल मछली का उत्पादन हो रहा है, जिसकी बाजार में आसानी से बिक्री हो जाती है। उत्पादन और प्रजातियों में विविधता लाने के लिए वह अब तालाबों में गोल्डन फिश का बीज डालने की तैयारी कर रहे हैं।

महिलाओं को भुगतान करने के बाद राजेंद्र को सालाना करीब तीन लाख रुपये की बचत हो रही है, जबकि उनसे जुड़ी महिलाएं भी मछली पालन से आय अर्जित कर रही हैं।

जिला मत्स्य अधिकारी अभिषेक मिश्रा ने बताया कि राजेंद्र चमोली करीब पांच वर्षों से प्रेरणा मत्स्यजीवी सहकारी समिति से जुड़े हैं। इससे पहले वह सब्जी उत्पादन करते थे। विभागीय सहयोग और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत लाभ मिलने के बाद उन्होंने मछली पालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया। सात तालाबों में चल रहा उनका उत्पादन ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और रोजगार सृजन की दिशा में एक उदाहरण बन रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह