बिजली बिल माफी का वादा भूली सरकार, किसानों से वोट मांगने पर आनंद का सवाल

 


हरिद्वार, 08 जून (हि.स.)। पूर्व राज्य मंत्री एवं वरिष्ठ किसान नेता रविंद्र सिंह आनंद ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश सरकार पर किसानों एवं ग्रामीणों से किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं लक्सर क्षेत्र के किसानों के तीन माह के बिजली बिल माफ करने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक इस घोषणा को अमल में नहीं लाया गया।

प्रेस को जारी बयान में रविंद्र सिंह आनंद ने कहा कि लक्सर, हरिद्वार और पूरे उत्तराखंड का किसान प्राकृतिक आपदाओं, अनियमित बारिश, सूखा, बाढ़ तथा जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक से परेशान है। इसके साथ ही खेती की लागत लगातार बढ़ने से किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। ऐसे समय में सरकार राहत देने के बजाय बिजली बिलों और सरचार्ज का अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार जनपद प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां गन्ना, धान, गेहूं सहित कई प्रमुख फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इसके बावजूद किसानों को उनकी जरूरत के अनुरूप सुविधाएं और राहत नहीं मिल रही हैं। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में किसानों की समस्याओं को भुला दिया जाता है।

रविंद्र सिंह आनंद ने मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि यदि सरकार किसानों के तीन माह के बिजली बिल माफ करने की घोषणा को लागू नहीं कर सकती, तो उसे किसानों और ग्रामीणों से वोट मांगने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जब वादा पूरा नहीं हुआ, तो सरकार किस आधार पर गांव-गांव जाकर समर्थन मांगेगी।

उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तुलना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में निजी नलकूपों पर किसानों को बिजली शुल्क में राहत दी जा रही है, जबकि उत्तराखंड में बिजली दरें लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऊर्जा उत्पादन वाले प्रदेश का किसान ही सबसे अधिक बिजली शुल्क का बोझ झेल रहा है।

पूर्व राज्य मंत्री ने मांग की कि किसानों के तीन माह के बिजली बिल तत्काल माफ किए जाएं, बिजली बिलों पर लगाया जाने वाला सरचार्ज समाप्त किया जाए तथा कृषि उपभोक्ताओं के लिए विशेष रियायती दरें लागू की जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं किया तो किसान, मजदूर और ग्रामीण जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।

उन्होंने कहा कि किसानों को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर राहत चाहिए। सरकार को खेती-किसानी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि किसानों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला