प्लास्टिक कचरा हिमालयी नदियों व जधाराओं के लिए गंभीर खतरा
नई टिहरी, 04 नवंबर (हि.स.)। भिलंगना ब्लॉक के बालगंगा महाविद्यालय सेंदुल केमर में नमामि गंगे अभियान के तहत जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, हिमालयी संस्कृति और पर्यावरण संतुलित विकास विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विषय विशेषज्ञों ने गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, जल प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे के दुष्प्रभाव और हिमालयी पर्यावरण को सुरक्षित रखने पर जोर दिया।
बुधवार बालगंगा कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. राकेश रतूड़ी ने कहा कि कृषि में रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के अनियंत्रित प्रयोग से मिट्टी और जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव नदियों, जलीय जीवों और मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। डॉ. जितेंद्र डोभाल ने कहा कि प्लास्टिक कचरा हिमालयी नदियों, जलधाराओं के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
उन्होंने प्लास्टिक का उपयोग कम करने, कचरे का उचित निस्तारण करने और नदी घाटियों को स्वच्छ रखने में जनसहभागिता की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. बीसी उनियाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है।
इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इस मौके पर संयोजक डॉ. बद्रीश बडोनी, डॉ. डीएस भंडारी, डॉ. सरिता बहुगुणा, डॉ. मुकेश नैथानी, डॉ. रीना पुरोहित, डॉ. अर्चना कुनियाल, डॉ. सुनील रावत, डॉ. जयवीर सिंह और डॉ. कृष्ण चंद नेगी मौजूद थे।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी