एसटीएच में डॉक्टरों का प्रदर्शन: इंटर्न, हड़ताल पर पीजी और सीनियर रेजिडेंट

 

हल्द्वानी , 11 सितंबर (हि.स.)। सुशीला तिवारी अस्पताल परिसर में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर डॉक्टरों का आंदोलन लगातार बढ़ता जा रहा है। एमबीबीएस इंटर्न पांच दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जबकि पीजी रेजिडेंट तीन दिन से हड़ताल कर रहे हैं। अब शुक्रवार से सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं। तीनों श्रेणियों के डॉक्टरों की हड़ताल जारी रहने से अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर दबाव बढ़ गया है।

एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर वर्तमान ₹17 हजार मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30 हजार करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई के मौजूदा दौर में भोजन, आवास, परिवहन और अन्य आवश्यक खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि अस्पताल की ओपीडी, आईपीडी, वार्ड और इमरजेंसी सेवाओं में इंटर्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में समयबद्ध संशोधन की व्यवस्था भी होनी चाहिए। वहीं पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों ने स्टाइपेंड बढ़ाकर न्यूनतम ₹1 लाख प्रतिमाह करने की मांग उठाई है।

रेजिडेंट डॉक्टरों के अनुसार वे विशेषज्ञ प्रशिक्षण के साथ वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, नाइट ड्यूटी और ऑन-कॉल सेवाओं में लगातार जिम्मेदारी निभाते हैं। उनका कहना है कि बढ़ते शैक्षणिक और जीवन-यापन के खर्च तथा अन्य राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड के मुकाबले उत्तराखंड में कम भुगतान उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ा रहा है। पीजी डॉक्टरों का दावा है कि वर्तमान में उन्हें करीब 69 हजार 8 साै 20 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है और एमडी/एमएस की पढ़ाई में फीस के साथ आवास, भोजन, किताबें, शोध और अन्य पेशेवर खर्च भी उठाने पड़ते हैं।

रेजिडेंट डॉक्टर स्टाइपेंड में नियमित और पारदर्शी संशोधन की व्यवस्था की भी मांग कर रहे हैं। इसी बीच अब सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। सीनियर रेजिडेंट वर्तमान में मिल रहे करीब ₹85 हजार मासिक स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। तीनों वर्गों के डॉक्टरों के एक साथ आंदोलन में आने से एसटीएच में स्टाइपेंड का मुद्दा अब व्यापक रूप ले चुका है। डॉक्टरों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित करना नहीं, बल्कि उनकी जिम्मेदारियों, कार्यभार और बढ़ती महंगाई के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड सुनिश्चित कराना है। अब डॉक्टर सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग से मांगों पर जल्द निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता