नंदी देवी की अगरबत्ती-धूपबत्ती ने गांव से बाजार तक बनाई पहचान
गोपेश्वर, 20 अगस्त (हि.स.)। पहाड़ के छोटे से गांव में सीमित संसाधनों से शुरू किया गया अगरबत्ती और धूपबत्ती निर्माण का काम नंदी देवी के लिए आज आत्मनिर्भरता की पहचान बन चुका है। थराली विकासखंड की ग्राम पंचायत भटियाणा निवासी नंदी देवी ने नवंबर 2020 में घर से यह कारोबार शुरू किया था। मेहनत, बाजार की समझ और सरकारी सहयोग से उनका ‘तपोवन’ ब्रांड अब कई बाजारों तक पहुंच चुका है और कारोबार करीब एक लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गया है।
नंदी देवी की कहानी इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर मिलने पर पहाड़ की महिलाएं घर और गांव में रहकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। ग्रामोत्थान परियोजना (रीप), जय मां भवानी स्वयं सहायता समूह और आस्था महिला आजीविका स्वायत्त सहकारिता, कुलसारी से जुड़ने के बाद उन्हें कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग मिला।
शुरुआत में कच्चा माल जुटाना, उत्पाद तैयार करना, गुणवत्ता बनाए रखना और बाजार तलाशना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने धीरे-धीरे बाजार की मांग को समझा और उत्पाद की गुणवत्ता तथा खुशबू पर विशेष ध्यान दिया। ग्राहकों का भरोसा बढ़ने के साथ मांग भी बढ़ती गई।
भटियाणा से शुरू हुआ ‘तपोवन’ अब कुलसारी, थराली, देवाल, ग्वालदम, नारायणबगड़, कर्णप्रयाग, पौड़ी, देहरादून और ऋषिकेश के बाजारों तक पहुंच चुका है। गांव में तैयार होने वाली अगरबत्ती और धूपबत्ती अब पहाड़ के विभिन्न बाजारों में अपनी पहचान बना रही हैं।
व्यवसाय के विस्तार में ग्रामोत्थान परियोजना की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। वर्ष 2024 में नंदी देवी को परियोजना के तहत 75 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इसके अलावा कारोबार बढ़ाने के लिए उन्होंने 1.50 लाख रुपये का ऋण लिया। इससे कच्चा माल जुटाने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार का विस्तार करने में मदद मिली।
नंदी देवी ने अपने उद्यम को केवल परिवार तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं को भी काम से जोड़ा है। वर्तमान में रोशनी जोशी, रेखा देवी और बुदली देवी समेत चार-पांच ग्रामीण महिलाएं उनके साथ अगरबत्ती और धूपबत्ती निर्माण में काम कर रही हैं। इससे महिलाओं को गांव में ही रोजगार और आय का अवसर मिल रहा है।
नंदी देवी के बेटे पंकज भी कारोबार को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। बाजार से संपर्क बढ़ाने और उत्पादों को नए क्षेत्रों तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। परिवार के सहयोग और नंदी देवी की मेहनत से घर में शुरू हुआ काम अब एक व्यवस्थित कारोबार का रूप ले चुका है।
नंदी देवी का कहना है कि किसी महिला को सही अवसर, मार्गदर्शन और थोड़ा सहयोग मिल जाए तो वह अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। स्वयं सहायता समूह और ग्रामोत्थान परियोजना से मिले सहयोग ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ कारोबार विस्तार का आत्मविश्वास भी दिया।
अब नंदी देवी ‘तपोवन’ को उत्तराखंड से बाहर के बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी में हैं। उनका लक्ष्य अधिक से अधिक ग्रामीण महिलाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है।
भटियाणा गांव से शुरू हुई नंदी देवी की यह पहल बताती है कि पहाड़ में अवसर सीमित हो सकते हैं, लेकिन हुनर, मेहनत और सही सहयोग से गांव से शुरू हुआ कारोबार दूर तक अपनी पहचान बना सकता है।
हिन्दुस्थान समाचार / जगदीश पोखरियाल