ग्रामीण विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वालाे काे नाबार्ड ने सम्मानित किया
देहरादून, 14 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) राष्ट्र सेवा के 45 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मंगलवार काे नाबार्ड, उत्तराखण्ड क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून में 45वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर “ग्रामीण वित्तीय संस्थाओं द्वारा जमीनी स्तर पर ऋण प्रवाह में वृद्धि” विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें ग्रामीण वित्त, कृषि ऋण, वित्तीय समावेशन एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास में अहम याेगदान देने वाले हितधारकाें काे सम्मानित भी किया गया।
इस अवसर पर नाबार्ड की 45 वर्षों की विकास यात्रा तथा उत्तराखण्ड क्षेत्रीय कार्यालय की वित्तीय वर्ष 2025-26 की प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित विशेष प्रस्तुति भी प्रदर्शित की गई।
कार्यक्रम में बताैर मुख्य अतिथि डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि नाबार्ड ने पिछले 45 वर्षों में कृषि, ग्रामीण विकास व जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन, आधारभूत संरचना विकास व सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के माध्यम से नाबार्ड ने सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। उन्होंने कृषक उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, सामूहिक विपणन को सुदृढ़ करने व कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में नाबार्ड की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने कहा कि नाबार्ड के सहयोग से सहकारी बैंकों को मोबाइल बैंकिंग वैन उपलब्ध कराई गई हैं तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की बैंकिंग सेवाओं को कोर बैंकिंग समाधान के माध्यम से सुदृढ़ किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुँच और बेहतर हुई है।
पंकज यादव, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 उत्तराखण्ड क्षेत्रीय कार्यालय के इतिहास का सर्वश्रेष्ठ वर्ष रहा। इस दौरान राज्य में 5,061 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है। सहकारी बैंकों एवं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को 4,179 करोड़ का पुनर्वित्त उपलब्ध कराया गया तथा ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के अंतर्गत 743 करोड़ की स्वीकृति एवं 754 करोड़ का वितरण किया गया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड केवल वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवर्तन का एक सशक्त विकास भागीदार है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल