यूओयू में वित्तीय प्रबंधन पर विशेष व्याख्यान एवं ईवी चार्जिंग स्टेशन का उद्घाटन

 


हल्द्वानी , 21 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र (सीआईक्यूए) द्वारा ‘स्वायत्त सार्वजनिक संस्थानों, विशेषकर उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में वित्तीय प्रबंधन एवं जवाबदेही’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में भारत के पूर्व उप नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक डिप्टी कम्पट्रोलर ऑडिटर जनरल ऑफ़ इंडिया श्री निरंजन पंत ने मुख्य वक्ता के रूप में वित्तीय प्रबंधन, जवाबदेही एवं संस्थागत वित्तीय व्यवस्था के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से विचार साझा किए।

कार्यक्रम का उद्घाटन संबोधन अनुसंधान निदेशालय एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन केंद्र (सीआईक्यूए) के प्रमुख प्रो. गिरिजा पाण्डे ने किया। उन्होंने कहा कि सीआईक्यूए विश्वविद्यालय में वित्तीय समझ, संस्थागत कार्यप्रणाली तथा शैक्षणिक प्रदर्शन में निरंतर सुधार की दिशा में कार्य कर रहा है।

इसी उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी एवं विशेषज्ञ वक्ताओं को विश्वविद्यालय में आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि उनके अनुभव से संस्थान को सीखने का अवसर मिले। उन्होंने आशा व्यक्त की कि श्री निरंजन पंत का अनुभव और मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

अपने विशेष व्याख्यान में श्री निरंजन पंत ने वित्तीय प्रबंधन की मूल अवधारणा एवं उसके प्रमुख घटकों पर चर्चा करते हुए कहा कि वित्तीय प्रबंधन केवल लेखांकन या बजट तैयार करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने वित्तीय प्रबंधन के प्रमुख आयामों में योजना एवं बजट निर्माण, व्यय एवं खरीद प्रक्रिया, परिसंपत्तियों का प्रबंधन, लेखा व्यवस्था, आंतरिक नियंत्रण एवं लेखा परीक्षा तथा संसाधनों के संकलन को शामिल किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान का बजट उसकी प्राथमिकताओं और लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने वित्तीय निर्णयों में वैधानिकता, औचित्य एवं सक्षम प्राधिकरण से अनुमोदन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कार्य निष्पादन आधारित बजट एवं परिणामोन्मुख बजट व्यवस्था पर भी विस्तार से प्रकाश डाला और बताया कि संस्थागत वित्तीय प्रबंधन को केवल व्यय की निगरानी के बजाय परिणामों एवं उपलब्धियों से जोड़ना आवश्यक है।

पंत ने अंतिम चरण में मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा तथा मुक्त विश्वविद्यालयों के संदर्भ में वित्तीय प्रबंधन पर चर्चा की। उन्होंने विश्व स्तर पर विश्वविद्यालयों के विकास तथा भारत और अन्य देशों में मुक्त विश्वविद्यालयों के विकास की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बदलते शैक्षणिक परिवेश के अनुरूप संस्थानों की भूमिका और प्राथमिकताओं पर विचार साझा किए। उन्होंने उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए और विश्वविद्यालय को हिमालयी विषयों एवं हिमालय-केंद्रित अध्ययन का विशिष्ट संस्थान के रूप में एक नई पहचान विकसित करने की दिशा में कार्य करने का सुझाव दिया।

माननीय कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहानी ने अपने संबोधन में श्री निरंजन पंत द्वारा साझा किए गए विचारों एवं सुझावों की सराहना की। उन्होंने कहा कि व्याख्यान में प्रस्तुत कई बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण एवं विचारोत्तेजक हैं, जिन्हें गंभीरता से समझते हुए संस्थागत स्तर पर लागू करने की दिशा में शीघ्र प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि श्री निरंजन पंत भविष्य में भी विश्वविद्यालय से जुड़े रहेंगे तथा अपने अनुभव और मार्गदर्शन से विश्वविद्यालय को लाभान्वित करते रहेंगे।

कार्यक्रम में प्रो. नवीन चन्द्र लोहानी, श्री निरंजन पंत, प्रो. मंजरी अग्रवाल, प्रो. गिरिजा पाण्डे एवं श्री खेमराज भट्ट सहित विशेषज्ञों का पैनल उपस्थित रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, गैर-शैक्षणिक कर्मचारी तथा लेखा अनुभाग से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन उद्योग-अकादमिक प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रो. मंजरी अग्रवाल द्वारा किया गया। उन्होंने श्री निरंजन पंत के प्रति विश्वविद्यालय के साथ अपने अनुभव एवं बहुमूल्य समय साझा करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने के लिए आई.सी.टी. एवं मीडिया टीम का भी धन्यवाद किया। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. गगन सिंह द्वारा किया गया।

ईवी चार्जिंग स्टेशन का उद्घाटन

विशेष व्याख्यान के पश्चात विश्वविद्यालय परिसर में ईवी चार्जिंग स्टेशन के उद्घाटन का आयोजन किया गया। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय एवं ईज़ी चार्ज इज़ी चार्ज के सहयोग से स्थापित इस ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन का उद्देश्य परिसर में विद्युत वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत परिवहन को बढ़ावा देना है।

इस अवसर पर ईज़ी चार्ज के प्रतिनिधि श्री प्रशांत उपस्थित रहे। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया और परिसर में विद्युत वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।ईवी चार्जिंग स्टेशन की स्थापना विश्वविद्यालय द्वारा पर्यावरणीय जिम्मेदारी, हरित प्रौद्योगिकी एवं सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता