तीन वर्षों में कुमाऊं विश्वविद्यालय ने हासिल की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ: कुलपति

 


नैनीताल, 11 अगस्त (हि.स.)। कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान रावत ने मंगलवार को विभिन्न संकायाध्यक्षों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के साथ संवाद में वर्ष 2023 से 2026 के बीच यानी अपने कार्यालय में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान, प्रशासनिक एवं आधारभूत संरचना के क्षेत्र में हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस अवधि में शैक्षणिक सत्रों एवं परीक्षा व्यवस्था को नियमित करने, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार तथा विद्यार्थियों के लिए नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। इनमें से कई कार्य ऐसे हैं जो विश्वविद्यालय बनने के बाद पहली बार हुए हैं।

प्रो. रावत ने बताया कि विश्वविद्यालय को मेरू परियोजना के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये का अनुदान तथा एएनआरएफ-पेयरके अंतर्गत भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु के साथ 100 करोड़ रुपये की परियोजना मिली है। मेरू के अंतर्गत देश के 26 राज्य विश्वविद्यालयों के साथ कुविवि का चयन हुआ है। इसके तहत विश्वविद्यालय को पटवाडांगर में 26.5 एकड़ भूमि भी प्राप्त हुई है, जहां भविष्य में मेरू परिसर विकसित करने की योजना है। जबकि एएनआरएफ-पेयर परियोजना से विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को देश के अग्रणी वैज्ञानिक संस्थानों के साथ कार्य करने के अवसर मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि परीक्षा एवं शैक्षणिक व्यवस्था को नियमित करने के साथ मई-जून 2025 के परिणाम तीन सप्ताह के भीतर घोषित किए गए तथा परीक्षा संबंधी सूचना के अधिकार के मामलों में 67 प्रतिशत कमी दर्ज की गई। आधारभूत संरचना के क्षेत्र में 12 शैक्षणिक भवन एवं प्रमुख सुविधाओं का विकास किया गया, जिनमें फार्मेसी अकादमिक भवन एवं प्रयोगशाला, डीएसबी परिसर की सूचना प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला, आईटीईपी विभाग, हर्मिटेज का सम्मेलन कक्ष, सोनगांव में विधि संकाय, होटल प्रबंधन सुविधाएं तथा केंद्रीय पुस्तकालय में श्री कालू महर स्मृति वाचनालय प्रमुख हैं। अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए आंतरिक शोध निधि तथा पेटेंट दाखिल करने हेतु वित्तीय सहायता शुरू की गई। विद्यार्थियों के लिए प्रतिभा खोज, विद्या सेतु, पुस्तकालय चौंपियन पुरस्कार, पीएचडी फैलोशिप तथा प्रयोगशाला एवं कार्यालय प्रशिक्षण जैसी पहल शुरू की गई हैं।

अनाथ विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क शिक्षा और एसएसबी प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है। विश्वविद्यालय ने 26 संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन किए हैं तथा जाइस्ट, जापान और केस्ट, दक्षिण कोरिया के साथ सहयोग से विद्यार्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण एवं आदान-प्रदान के अवसर विकसित किए हैं। जाइस्ट के सहयोग से दो विद्यार्थियों को निःशुल्क प्रशिक्षण का अवसर मिला है। गोपनीय परीक्षा मुद्रण में खुली निविदा व्यवस्था लागू करने से पांच करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है, जबकि 38 करियर उन्नयन योजना मामलों का निस्तारण तथा सात नई नियुक्तियां की गईं। पर्यावरण संरक्षण के तहत परिसर में 788 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा पैनल लगाए गए हैं। साथ ही 42 आवासीय इकाइयों का नवीनीकरण तथा छात्रावासों में सुविधाओं का विस्तार किया गया। कुलपति ने कहा कि ये उपलब्धियां विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने आगामी प्राथमिकताओं में पटवाडांगर में मेरू परिसर का विकास, बहुविषयक शिक्षा एवं अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नई नियुक्तियां और आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को बताया।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी