विश्व शांति के लिए केदारनाथ धाम में शिवपुराण
गुप्तकाशी, 01 अगस्त (हि.स.)। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख भगवान केदारनाथ के पावन धाम में विश्व शांति, मानव कल्याण एवं सनातन धर्म के संरक्षण उद्देश्य से शनिवार को 11 दिवसीय संगीतमय शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, जलकलश यात्रा एवं हनुमान ध्वजा स्थापना के साथ आरंभ हुए इस आध्यात्मिक महायज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मुख्य आयोजक व्यवसायी विशाल वीर सिंह सुखानी के नेतृत्व में, बीकेटीसी, केदार सभा तथा केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों के सहयोग से आयोजित यह धार्मिक अनुष्ठान 1 अगस्त से शुरू होकर पूर्णाहुति के साथ ही 11 अगस्त को समापन हो जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती नदी से लगभग 200 श्रद्धालुओं द्वारा निकाली गई भव्य जलकलश यात्रा से हुई। भक्तों ने हर-हर महादेव के जयघोष के बीच पवित्र जल लेकर कथा स्थल तक यात्रा की और हनुमान ध्वजा की स्थापना के साथ कथा का विधिवत शुभारंभ किया।
कथा व्यास आचार्य शिवराम भट्ट ने प्रथम दिवस की कथा में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, उनकी करुणा, वैराग्य और कल्याणकारी स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान केदारनाथ की तपोभूमि वही पावन भूमि है, जहाँ पांडवों को मोक्ष का मार्ग प्राप्त हुआ। ऐसी पुण्यभूमि में शिवमहापुराण का श्रवण करने वाला प्रत्येक श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मशुद्धि एवं शिवकृपा का पात्र बनता है। उन्होंने कहा कि शिवमहापुराण केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार की दिशा देने वाला दिव्य ग्रंथ है।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व वैदिक परंपरा के अनुसार पंचपूजन, भद्रमंडल स्थापना एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का संपादन विद्वान आचार्यों द्वारा किया गया। कथा में ब्रह्म पद पर विराजे बिपिन जमलोकी, केदारसभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, अरुण शुक्ला, संजय तिवारी, विष्णुकांत शुक्ला, राजेंद्र तिवारी, उमेश पोस्ती प्रवीण तिवारी, अंकित सेमवाल, समेत सैकड़ो भक्त मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / बिपिन