लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम को प्रशासन सतर्क, पशुओं के परिवहन पर रोक

 

पौड़ी गढ़वाल, 27 अगस्त (हि.स.)। जनपद में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) के संक्रमण की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। शासन की अधिसूचना के क्रम में जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने संबंधित विभागों को प्रभावी निगरानी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम के लिए जनपद में गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं के अंतरराज्यीय और अंतरजनपदीय परिवहन पर 25 अगस्त से 25 सितंबर 2026 तक रोक लगाई गई है। इसके अनुपालन में जनपद के प्रमुख प्रवेश द्वारों और पुलिस चेक पोस्टों पर सघन निगरानी की जाएगी। श्रीकोट श्रीनगर, कोड़िया पुलिस चौकी कोटद्वार, सिद्धबली चौकी कोटद्वार तथा शंकरपुर-धुमाकोट (नैनीडांडा-अल्मोड़ा बॉर्डर) सहित संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीमें चेकिंग करेंगी। आवश्यकता पड़ने पर पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को जनपद में गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी विकासखंडों में विशेष निगरानी रखने और पशुपालकों को बीमारी के लक्षणों तथा बचाव के उपायों की जानकारी देने को कहा है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि दुगड्डा, कल्जीखाल और पौड़ी क्षेत्र से संदिग्ध पशुओं के नमूने जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि संक्रमण की रोकथाम के लिए पशु प्रदर्शनियों, मेलों और गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं के एकत्रीकरण से संबंधित गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है।

उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि पशुओं में बुखार, गले के आसपास सूजन, शरीर पर गांठें या चकत्ते, त्वचा पर नोड्यूल, भूख कम लगना, दुग्ध उत्पादन में कमी, पैरों में सूजन या लंगड़ापन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल निकटतम पशु चिकित्सालय अथवा पशु चिकित्साधिकारी से संपर्क करें। संदिग्ध अथवा प्रभावित पशु को अन्य पशुओं से अलग रखने और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार कराने की अपील की गई है। डॉ. शर्मा ने कहा कि जिन पशुपालकों ने अभी तक अपने पशुओं का लम्पी रोग के विरुद्ध टीकाकरण नहीं कराया है, वे प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण करवाएं। गौशालाओं में नियमित साफ-सफाई, कीटाणुनाशक का छिड़काव तथा मक्खी-मच्छरों के नियंत्रण के उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया है। पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए मिनरल मिक्सचर और आवश्यक पोषक तत्व देने की सलाह दी गई है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश मामलों में उचित देखभाल और उपचार से 14 से 21 दिनों के भीतर लक्षण धीरे-धीरे कम हो जाते हैं। पशुपालकों को घबराने के बजाय सतर्कता बरतनी चाहिए और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तत्काल पशुपालन विभाग को सूचना देनी चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह