स्वयं सहायता समूहों के कारोबार को मिलेगी रफ्तार

 

पौड़ी गढ़वाल, 08 अगस्त (हि.स.)। गांवों में छोटे-छोटे कारोबार के जरिए अपने परिवार की आय बढ़ाने का सपना देख रहीं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए अगस्त का महीना उम्मीद लेकर आया है। अब बैंक ऋण के लिए महीनों इंतजार करने के बजाय समूहों को विशेष शिविरों में ही अपनी समस्याओं का समाधान और ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कराने का मौका मिलेगा।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों के लिए 11 से 27 अगस्त तक विकासखंड और बैंक शाखा स्तर पर विशेष ऋण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में लंबित ऋण आवेदनों के निस्तारण के साथ पात्र समूहों को कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) सहित अन्य बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह महिलाओं के लिए केवल बचत का माध्यम नहीं रह गए हैं। कई महिलाएं समूहों से जुड़कर कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, स्थानीय उत्पादों और छोटे स्वरोजगार से अपनी आय बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। ऐसे में समय पर बैंक ऋण मिलना उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी ने अधिकारियों और बैंक प्रबंधकों को निर्देश दिए हैं कि शिविरों में लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाया जाए। विभाग का प्रयास है कि बैंक, एनआरएलएम और समूहों के बीच समन्वय मजबूत हो और पात्र समूहों को ऋण के लिए अनावश्यक रूप से भटकना न पड़े।

शिविरों के जरिए अब सिर्फ ऋण बांटने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं के छोटे कारोबार को आर्थिक सहारा देने की कोशिश है। यदि योजना के अनुसार ऋण प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण होता है तो आने वाले दिनों में कई समूह अपनी आजीविका गतिविधियों का विस्तार कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी तैयार कर सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह