भाजपा सरकार के चार साल पूरे होने पर उत्सव, गांव-गांव उपलब्धियां पहुंचाएंगे कार्यकर्ता

 

देहरादून, 22 मार्च (हि.स.)। उत्तराखंड में धामी सरकार के दूसरे टर्म के चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर प्रदेशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चार साल की उपलब्धियों के साथ ही जन कल्याण की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। राज्य की विकास यात्रा में केंद्र सरकार का निरंतर सहयोग मिला है। केंद्र और राज्य के वरिष्ठ नेताओं के अनुभव, मार्गदर्शन और संगठन के कार्यकर्ताओं की मेहनत ने विकास यात्रा को गति दी है।

सूचना विभाग के जारी बयान में मुख्यमंत्री धामी ने अपने चार साल की उपलब्धियां बताई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जन कल्याण सर्वाेपरि की भावना के साथ कार्य करते हुए हर वर्ग के कल्याण को प्राथमिकता दी है और आगे भी प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेगी। उन्होंने बताया कि आर्थिक मोर्चे पर भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में राज्य का जीएसडीपी 3.81 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो 2021-22 की तुलना में डेढ़ गुना वृद्धि दर्शाता है। प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 2.73 लाख हो गई है, जबकि मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स घटकर 6.92 प्रतिशत पर आ गया है। राज्य का ग्रोथ रेट 7.23 प्रतिशत रहा, जो मजबूत आर्थिक आधार को दर्शाता है।

औद्योगिक विकास के क्षेत्र में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान 3.56 लाख करोड़ के एमओयू साइन हुए, जिनमें से 1 लाख करोड़ से अधिक का निवेश जमीन पर उतर चुका है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में उत्तराखण्ड को “लीडर” का दर्जा मिला है, वहीं एमएसएमई की संख्या बढ़कर लगभग 80 हजार तक पहुंच गई है। इससे लाखों लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं।

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अटल आयुष्मान योजना के तहत 61 लाख कार्ड बनाए गए और 17 लाख से अधिक मरीजों को 34 सौ करोड़ से अधिक का मुफ्त इलाज मिला। महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण, सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत भागीदारी और “लखपति दीदी” योजना के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक महिलाओं का सशक्तिकरण, राज्य की सामाजिक समावेशन नीति को दर्शाता है।

अवसंरचना विकास

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड, रोपवे परियोजनाएं और हेली सेवाओं का विस्तार, कनेक्टिविटी को नई दिशा दे रहे हैं। राज्य में हेलीपोर्ट और हेलीपैड की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

रोपवे परियोजनाओं से आसान होगी यात्रा

प्रदेश में तीर्थ यात्राओं को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए बड़े स्तर पर रोपवे परियोजनाओं की शुरुआत की गई है। केदारनाथ धाम के लिए सोनप्रयाग से 12.9 किमी लंबा रोपवे 4,081 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा। वहीं, हेमकुण्ड साहिब के लिए गोविंदघाट से 12.4 किमी रोपवे 2,730 करोड़ की लागत से तैयार किया जाएगा। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद श्रद्धालुओं की यात्रा समय और कठिनाई दोनों में बड़ी कमी आएगी।

शीतकालीन यात्रा और धार्मिक सर्किट पर फोकस

उत्तराखण्ड में पहली बार शीतकालीन यात्रा की शुरुआत की गई, जिससे पर्यटन को वर्षभर बढ़ावा मिल रहा है। इस पहल को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मुखवा पहुंचे, जो मां गंगा का शीतकालीन निवास स्थल है। कुमाऊं क्षेत्र में मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के तहत 48 मंदिरों और गुरुद्वारों को एक धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।

धामों का कायाकल्प

केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत तेजी से कार्य जारी है। बदरीनाथ धाम को स्मार्ट आध्यात्मिक पहाड़ी कस्बे के रूप में विकसित करने के लिए 255 करोड़ की योजनाएं संचालित हैं। इसके साथ ही हरिपुर कालसी में यमुना तीर्थ स्थल का निर्माण और महासू मंदिर, हनोल के मास्टर प्लान को मंजूरी देकर नए धार्मिक स्थलों को भी विकसित किया जा रहा है।

एडवेंचर और स्पोर्ट्स टूरिज्म को बढ़ावा

उत्तराखण्ड को एडवेंचर टूरिज्म हब बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राज्य में 83 प्रमुख हिमालयी चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोल दिया गया है, जिससे देश-विदेश के पर्वतारोहियों को आकर्षित किया जा रहा है। आदि कैलाश में राज्य की पहली हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन का आयोजन किया गया, जिसमें 22 राज्यों से 700 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। यह आयोजन एडवेंचर टूरिज्म को नई पहचान दे रहा है। राज्य ट्रेकिंग, रिवर राफ्टिंग, स्टार गैजिंग का प्रमुख आकर्षण बन कर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेड इन उत्तराखंड की अपील के बाद वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर भी पहचान बन रही है।

ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में विकास

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत चयनित गांवों में 270 करोड़ की लागत से करीब 200 विकास योजनाओं पर कार्य जारी है। साथ ही, 13 जिलों में 13 आदर्श संस्कृत ग्रामों का शुभारंभ किया गया है। उधमसिंहनगर के खुरपिया फार्म में स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप की स्वीकृति और टनकपुर-बागेश्वर रेललाइन को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने के प्रयास, राज्य के औद्योगिक विकास को नई दिशा दे रहे हैं।

शिक्षा और संस्कृति में नवाचार

उत्तराखण्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना। वहीं, दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना की गई है। राज्य के स्कूलों में श्रीमद् भगवद् गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय भी सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पर्यटन, ऊर्जा और खेलों में रिकॉर्ड उपलब्धियां

राज्य में पर्यटन ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वर्ष 2025 में 6.03 करोड़ से अधिक पर्यटक उत्तराखण्ड पहुंचे, जबकि चार धाम यात्रा में लगभग 48 लाख श्रद्धालु शामिल हुए। कांवड़ यात्रा में 4.15 करोड़ से अधिक शिवभक्तों की भागीदारी रही। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य की सौर ऊर्जा क्षमता 1 गीगावाट से अधिक पहुंच गई है। न्च्ब्स् ने 42,000 से अधिक सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कर नया कीर्तिमान बनाया है।

सम्मान और उपलब्धियां

उत्तराखण्ड ने विभिन्न राष्ट्रीय सूचकांकों में शानदार प्रदर्शन किया है। नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में राज्य ने छोटे राज्यों की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं, एसडीजी इंडेक्स 2023-24 में भी उत्तराखण्ड देश में शीर्ष स्थान पर रहा।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में अचीवर और स्टार्टअप रैंकिंग में “लीडर” श्रेणी प्राप्त करना राज्य की कारोबारी अनुकूल नीतियों को दर्शाता है। विंग्स इंडिया 2026 में उत्तराखण्ड को “बेस्ट स्टेट फॉर प्रमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खनन सुधारों में राज्य ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया, जिसके लिए 200 करोड़ की प्रोत्साहन राशि मिली। इसके अलावा, जखोल, सूपी, हर्षिल और गुंजी गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम के रूप में पुरस्कृत किया गया, जो ग्रामीण पर्यटन के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। चार वर्षों में “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र के साथ उत्तराखण्ड ने निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, पर्यटन और ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। यह दौर न केवल विकास का है, बल्कि राज्य के लिए एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। 

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल