यूजीसी नेट में वानिकी विषय को मिली मान्यता, हिमालयी छात्रों को मिलेगा लाभ
नैनीताल, 01 मई (हि.स.)। यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने वानिकी विषय को यूजीसी-नेट परीक्षा में शामिल करने का निर्णय लिया है, जिससे विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा और वन संरक्षण के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।
यूजीसी के सचिव श्यामा रथ द्वारा जारी पत्र के अनुसार जून 2026 में आयोजित होने वाली नेट परीक्षा में वानिकी विषय सम्मिलित किया गया है तथा इसका पाठ्यक्रम आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है। यह निर्णय यूजीसी की 597वीं बैठक में लिया गया, जिसमें कुमाऊं विवि के पूर्व छात्र तथा फैलो ऑफ नेशनल अकादमी एवं एचएफआरआई शिमला के पूर्व निदेशक डॉ. शेर सिंह सामंत की अध्यक्षता में गठित आठ सदस्यीय समिति ने पांच बैठकों के बाद पाठ्यक्रम तैयार किया। वानिकी विषय को नेट में शामिल करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। कूटा यानी कुमाऊं विवि शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने बताया कि कई बार यह मांग की गयी थी।
वानिकी को नेट परीक्षा में शामिल किए जाने से विशेष रूप से पूरे हिमालय प्रदेश के छात्र-छात्राएं लाभान्वित होंगी तथा वन संरक्षण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने वानिकी को हिमालयी क्षेत्र के सभी महाविद्यालयों में भी प्रारंभ किए जाने आवश्यकता जतायी है तथा डॉ.सामंत के प्रति आभार व्यक्त किया है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी