दून पुस्तकालय में ‘युवा कवि सम्मेलन’ का आयोजन
देहरादून, 26 सितंबर (हि.स.)। देहरादून स्थित दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के सभागार में शनिवार को ‘युवा कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में उभरते युवा कवियों ने समकालीन जीवन, समाज, मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों, प्रकृति और बदलते सामाजिक परिवेश से जुड़े विविध विषयों को अपनी रचनाओं में अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम की खासियत यह थी कि इसमें अन्य राज्यों के आये हुए कवि भी शामिल हुए। दिल्ली की मोनिका सिंह मोह ने पढ़ा कि मुझको सिले की आरज़ू कल थी न आज है, मैं खुश हूं अपनी नेकियां दरिया में डाल कर.., मीना सिंह मीन ने पढ़ा कि, जब तरक्की के किसी रंग में ढल जाते हैं, गैर तो गैर हैं अपने भी बदल जाते हैं.., आशा किरन ने कहा, मैं टूटूंगी बेतहाशा अंदर ही अंदर तुम भ्रम में रहना सब ठीक है.., ज्योति ने कहा, इश्क की तामील में हमने लहू तक दे दिया, बेवफा मेहबूब तो फिर भी है प्यासा देखिये.., कार्यक्रम की सदारत मीरा नवेली ने की।
मंच के संस्थापक कुलदीप धरवाल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम से लोगों में साहित्य के प्रति रूची बढ़ती है। ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन होते रहना चाहिए। सम्मेलन में मीरा नवेली 'सदारत', बदरुद्दीन जिया, शाख दूनवी, राही नेहटौरी, मोनिका सिंह 'मोह', मोनिका मंतशा, सचिन परवाना, आशा किरण, ज्योति, मीना सिंह 'मीन', आयुष शर्मा, नीलेश शर्मा, सागर डंगवाल, नेत्रा थपलियाल, राजीव बिल्ला 'मुसव्विर', प्रियंका नेगी, परवाना, सीमा पासी तथा मोहिनी जुगराण ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों से वाह-वाही लूटी।
युवा कवियों की रचनाओं में व्यक्तिगत अनुभवों और संवेदनाओं के साथ वर्तमान समाज की अनेक स्थितियों, मानवीय संबंधों और जीवन के बदलते स्वरूप की झलक दिखाई दी। कई कविताओं ने उपस्थित साहित्य प्रेमियों को विचार और संवाद के लिए भी प्रेरित किया। युवा कवियों को अपनी रचनाएं सीधे पाठकों और साहित्यप्रेमी श्रोताओं के बीच प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
युवा कवियों ने कहा कि नई पीढ़ी में रचनात्मक ऊर्जा और साहित्य के प्रति गहरी रुचि है। आवश्यकता इस बात की है कि युवा रचनाकारों को अपनी रचनाओं को सामने रखने और पाठकों तथा साहित्यकारों के साथ संवाद करने के पर्याप्त अवसर मिलें। ऐसे मंच युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ उनके लेखन को निरंतर विकसित करने में भी सहायक होते हैं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नवोदित युवा साहित्यकारों, साहित्यप्रेमियों, पाठकों, प्रबुद्ध नागरिकों तथा दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र से जुड़े लोगों ने सहभागिता की।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल