दून लाइब्रेरी ने कुमाऊंनी लोकगीतों के दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड किए डिजिटल

 


देहरादून, 06 अगस्त (हि.स.)। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र ने उत्तराखंड की लोकसंगीत विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए कुमाऊंनी लोकगीतों के छह दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्डों का डिजिटलीकरण किया है। ये रिकॉर्ड वर्ष 1930 के दशक के अंतिम वर्षों या 1940 के दशक की शुरुआत के माने जा रहे हैं और ब्रिगेडियर राजेंद्र रावत के निजी संग्रह से प्राप्त हुए हैं।

हल्द्वानी के रिस्की पाठक के सहयोग से गुरुवार को इन रिकॉर्डों में दर्ज 12 कुमाऊंनी लोकगीतों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया गया। इनमें मास्टर शेर सिंह, चंदा बाई, राम देई और इंदिरा बाई जैसे लोक कलाकारों की आवाज दर्ज है। डिजिटलीकृत सामग्री को दून लाइब्रेरी एंड रिसर्च सेंटर के संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा।

दून लाइब्रेरी की ओर से गुरुवार को बताया कि इससे पहले उसके संग्रह में पहाड़ी लोकसंगीत के चार दुर्लभ ग्रामोफोन रिकॉर्ड मौजूद थे। अब डिजिटलीकरण के बाद यह संख्या बढ़कर 10 हो गई है। संस्थान ने गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार क्षेत्र के वर्ष 1930 से 1970 के बीच जारी हुए ग्रामोफोन रिकॉर्डों की संभावित सूची भी तैयार की है, जिसमें 15 रिकॉर्डों का उल्लेख किया गया है।

इस परियोजना के दौरान कई नई ऐतिहासिक जानकारियां भी सामने आईं। इनमें मास्टर शेर सिंह के तीन ग्रामोफोन रिकॉर्डों की पुष्टि, भीमताल की चंदा बाई और राम देई जैसी कम चर्चित लोक कलाकारों की पहचान और इंदिरा बाई की रिकॉर्डिंग्स का दस्तावेजीकरण शामिल है।

इसी अवसर पर उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी की वर्ष 1992-93 में साक्षरता अभियान के लिए तैयार की गई दुर्लभ ऑडियो कैसेट 'ज्ञान गंगा' का भी डिजिटलीकरण किया गया। नौ गीतों वाली यह रिकॉर्डिंग लंबे समय से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी। दून लाइब्रेरी ने लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी से इन गीतों को सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक करने का अनुरोध भी किया है,ताकि यह सांस्कृतिक धरोहर भविष्य के लिए सुरक्षित रह सके।

कार्यक्रम में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, डॉ. नंद किशोर हटवाल, वरिष्ठ पत्रकार राजू गुंसाई, चन्द्रशेखर तिवारी, डॉ. लालता प्रसाद, सुंदर सिंह बिष्ट सहित अनेक लोकसंगीत प्रेमी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय