निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर प्रशासन सख्त, अतिरिक्त वसूली लौटाने के आदेश

 


नैनीताल, 27 जून (हि.स.)। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जनपद में निजी विद्यालयों द्वारा विभिन्न मदों में अनाधिकृत शुल्क वसूले जाने और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया है।

जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण एवं वसूली संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से हजारों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कई विद्यालय शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त प्रवेश शुल्क, विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क और अन्य विभिन्न मदों में मनमाने ढंग से शुल्क वसूल रहे थे।

जारी आदेश के अनुसार प्रवेश शुल्क केवल वास्तविक एवं औचित्यपूर्ण व्यय के आधार पर ही लिया जा सकेगा। शिक्षण शुल्क एवं परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त लिए जाने वाले अन्य शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में निर्धारित किया जाएगा, जिसे न्यूनतम रखा जाएगा और इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संघ (पीटीए) की स्वीकृति अनिवार्य होगी। किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार द्वारा बोर्ड से संबद्धता के लिए जारी एनओसी की शर्तों के अनुसार निजी विद्यालय तीन वर्षों में अधिकतम 10 प्रतिशत शुल्क वृद्धि ही कर सकेंगे और इसके लिए भी पीटीए की स्वीकृति आवश्यक होगी। विद्यालयों को पूरे शैक्षणिक सत्र में केवल चार मासिक परीक्षाएं, एक अर्द्धवार्षिक व एक वार्षिक परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि बोर्ड कक्षाओं में अधिकतम एक या दो प्री-बोर्ड परीक्षाएं ही आयोजित की जा सकेंगी।

परीक्षा शुल्क प्रश्नपत्र, उत्तर पुस्तिका एवं अन्य सामग्री की वास्तविक लागत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा व किसी भी स्थिति में उच्चतम कक्षा के लिए परीक्षा शुल्क 600 रुपये से अधिक नहीं होगा। स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) शुल्क केवल एक रुपया निर्धारित किया गया है।

अभिभावकों की सुविधा के लिए विद्यालयों को मासिक, त्रैमासिक, छमाही अथवा वार्षिक शुल्क भुगतान का विकल्प उपलब्ध कराना होगा तथा किसी भी अभिभावक को एकमुश्त शुल्क जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा। प्रत्येक शुल्क की रसीद देना भी अनिवार्य होगा। आदेश के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूले गए अतिरिक्त शुल्क का समायोजन एक जुलाई के शिक्षण शुल्क में किया जाएगा। यदि अतिरिक्त वसूली गई राशि जुलाई के शुल्क से अधिक होगी तो शेष राशि आगामी महीनों के शुल्क में समायोजित करनी होगी। सभी विद्यालयों को समायोजन का प्रमाणित विवरण सात दिन के भीतर शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने चेतावनी दी कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट) के तहत एक लाख रुपये तक तथा सीबीएसई बायलॉज के प्रावधानों के तहत पांच लाख रुपये तक का आर्थिक दंड, मान्यता समाप्त करने, एनओसी निरस्त करने सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी