हर की पैड़ी पर गूंज रही श्रीमद्भागवत कथा
हरिद्वार, 20 मई (हि.स.)। हर की पैड़ी में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर गंगा तट पर ज्ञान और भक्ति की अविरल धारा बह रही है। मालवीय घाट पर श्रीगंगा सभा के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मन्माध्व गौडेश्वर वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी ने श्रद्धालुओं को शुकदेव जी के भागवत में प्रवेश का अत्यंत भावपूर्ण प्रसंग सुनाया।
कथा व्यास ने कहा कि शुकदेव जी का भागवत में आगमन केवल एक ऋषि का प्रवेश नहीं, बल्कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अवतरण है, जिसने राजा परीक्षित ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण मानव समाज को मोक्ष का मार्ग दिखाया। उन्होंने बताया कि देवर्षि नारद के आग्रह पर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से युक्त श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना हुई।
कथा में वर्णन किया गया कि जन्म से ही ब्रह्मज्ञानी और वैराग्यवान शुकदेव जी संसार के मोह-माया से दूर वन की ओर चले गए थे। जब राजा परीक्षित को श्रापवश सात दिन में मृत्यु का ज्ञान हुआ, तब उन्होंने गंगा तट पर ऋषि-मुनियों की सभा में जीवन के अंतिम समय में मोक्ष का उपाय पूछा। उसी समय तेजस्वी युवा तपस्वी शुकदेव जी वहां पहुंचे। उनकी दिव्यता देखकर सभी ऋषि सम्मान में खड़े हो गए। तब राजा परीक्षित के प्रश्नों का उत्तर देते हुए शुकदेव जी ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत की अमृतमयी कथा सुनाई।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने सनातन संस्कृति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भागवत कथा समाज में प्रेम, सद्भाव और संस्कारों का संदेश दे रही है। इस अवसर पर हनुमंत झा, सिद्धार्थ चक्रपाणि, विकास प्रधान, उज्ज्वल पंडित, गोपाल प्रधान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला