महिला प्राध्यापक की आपत्तिजनक वीडियो प्रसारण प्रकरण में साइबर पुलिस सक्रिय, वीडियो हटाया गया
नैनीताल, 16 मई (हि.स.)। उत्तराखंड पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने एक महिला प्राध्यापक की कथित आपत्तिजनक वीडियो को वायरल किये जाने के प्रकरण में कार्रवाई करते हुए संबंधित वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया मंचों से हटवा दिया है।
मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66ई, 67 एवं 67ए तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 354सी के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। पुलिस के अनुसार मामले की जांच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ के पर्यवेक्षण में की जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कुमाऊं विवि के भीमताल परिसर में कार्यरत एक सहायक प्राध्यापक ने तल्लीताल थाना में आयुष नेगी, प्रशांत जोशी व भावेश पांडे के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई । आरोप लगाया था कि भवाली के एक व्यापारी नेता के साथ उनकी वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई। यह भी आरोप लगाया है कि उस पर व्यापारी नेता के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का दबाव बनाया और इनकार करने पर मानसिक प्रताड़ना दी गई।
पुलिस ने इस आरोप पर तीनों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर मामला साइबर प्रकोष्ठ को स्थानांतरित किया था। इस पर अब साइबर पुलिस ने संबंधित आपत्तिजनक वीडियो को विभिन्न सोशल मीडिया मंचों से हटाने के साथ मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है।
सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित वीडियो कहीं एआई यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से निर्मित तो नहीं है, जिसके लिए वीडियो का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं किसी षड्यंत्र के तहत पीड़िता का उपयोग तो नहीं किया गया। पुलिस ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति अब इस वीडियो को साझा अथवा अग्रेषित करता पाया गया तो उसके विरुद्ध सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में कार्रवाई की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी