पूर्व सीएम का केदारघाटी से था विशेष लगाव
गुप्तकाशी, 20 मई स्व. खंडूरी का केदार और कालीमठ घाटी से विशेष लगाव था। अपने किसी भी चुनाव से पूर्व वे सिद्धपीठ कालीमठ के दर पर मत्था टेकना नहीं भूलते । मां काली में उनकी असीम श्रद्धा थी। और उन्हीं की अनुकम्पा के बलबूते वे चुनाव में विजयी होते थे।
स्व. खंडूरी प्रति वर्ष कालीमठ आना नहीं भूलते थे। कालीमठ मंदिर में दर्शनों के साथ ही महाकवि कालिदास भू स्मारक समिति कविल्ठा के तत्वावधान में आयोजित कालिदास समारोह में बतौर मुख्य अतिथि भी कई बार स्व. खंडूड़ी शिरकत कर चुके हैं। उन्होंने महाकवि कालिदास की जन्मस्थली कविल्ठा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए अनुदान और भवन निर्माण के लिए सफल प्रयास किए थे।
सिद्ध पीठ काली मठ के पुजारी आचार्य सुरेशानंद गौड बताते हैं स्व . खंडूड़ी प्रत्येक चुनाव से पहले मां काली के दर पर माथा टेकर चुनाव का श्री गणेश करते थे। और खंडूरी के मधुर और सहज व्यवहार को देकर उनकी सफलता की कामना के लिए संपूर्ण क्षेत्र की जनता भी वचनबद्ध रहती थी।
उन्होंने कहा कि कालीमठ घाटी के विकास के लिए वर्ष 2003 में उन्होंने काली मठ में सात कमरों का धर्मशाला भी निर्मित किया। इसके साथ ही गुप्तकाशी से कालीमठ मोटर मार्ग चौड़ीकरण, डामरीकरण के लिए भी सतत प्रयास हमेशा प्रयास किए ।
वहीं दूसरी ओर वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों के गांव देवली भणि ग्राम को स्व. खंडूड़ी ने सांसद रहते हुए आदर्श सासद गांव के रूप में अंगीकृत किया था। गांव के सर्वांगीण विकास के लिए श्री खंडूरी ने शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए। दरअसल तीर्थ पुरोहितों के इस गांव में केदारनाथ आपदा में 54 लोग असमय काल कल वित हुए थे। ऐसे में अति संवेदनशील इस गांव के सर्वांगीण विकास के लिए स्व. खंडूरी ने वर्ष 2014 में अंगीकृत किया था।
उन्होंने तीन बार इस गांव में आकर सभाएं आयोजित कर क्षेत्रीय जनता की तमाम समस्याओं का समाधान भी किया। साथ ही गांव के संपर्क मोटर मार्ग के सुधारीकरण के लिए भी सतत प्रयास किए।
उनके दिवंगत होने से क्षेत्रीय जनता अपने आप को असहाय महसूस कर रही है। तत्कालीन सांसद प्रतिनिधि डॉ .आशुतोष किमोठी ने कहा कि उक्त अंगीकृत गांव के विकास और मुख्य समस्याओं के निराकरण के लिए हुए सदैव प्रयासरत रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / बिपिन