सिलाई और हुनर के दम पर पूजा रानी ने लिखी सफलता की कहानी

 


चंपावत, 22 मई (हि.स.)। पहाड़ की महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह अब केवल बचत का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनते जा रहे हैं। चम्पावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक की पूजा रानी इसकी एक प्रेरक मिसाल हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपना सिलाई कारोबार शुरू कर आज खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बना लिया है।

कभी घर-परिवार तक सीमित रहने वाली पूजा रानी अपने दम पर कुछ करने की इच्छा रखती थीं। इसी दौरान वह “जय गंगनाथ स्वयं सहायता समूह” से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें सरकारी योजनाओं और ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (रीप) की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी।

पूजा रानी ने गांव में सिलाई आधारित स्वरोजगार शुरू करने का फैसला किया। कारोबार शुरू करने के लिए करीब तीन लाख रुपये की जरूरत थी। उन्होंने खुद 75 हजार रुपये जुटाए, जबकि बैंक से डेढ़ लाख रुपये का ऋण मिला। बाकी सहायता रीप परियोजना के जरिए उपलब्ध कराई गई। आर्थिक सहयोग मिलने के बाद उन्होंने सिलाई मशीनों के साथ अपना काम शुरू किया।

शुरुआत में चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन मेहनत और हुनर के दम पर पूजा रानी ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बना ली। बेहतर डिजाइन और ग्राहकों के भरोसे ने उनके काम को आगे बढ़ाया। आज उनका सिलाई कारोबार क्षेत्र में अच्छी पहचान बना चुका है।

पूजा रानी अब सिलाई के साथ मेकअप कार्य भी कर रही हैं, जिससे उनकी आय में और बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में वह हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक कमा रही हैं। यही नहीं, वह नियमित रूप से बैंक ऋण की किस्तें भी चुका रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

स्थानीय स्तर पर पूजा रानी की सफलता को महिलाओं के लिए प्रेरणा के तौर पर देखा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं अब आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राजीव मुरारी