चंपावत दुष्कर्म मामला: पुलिस का दावा- बदले की भावना से रचा गया षड्यंत्र

 


चंपावत, 07 मई (हि.स.)। चंपावत में दर्ज दुष्कर्म प्रकरण की जांच में पुलिस ने सुनियोजित साजिश का खुलासा होने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, बदले की भावना से प्रेरित होकर नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर कथित घटनाक्रम रचा गया था। मामले में वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। गुरुवार को चंपावत पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि 06 मई को एक व्यक्ति ने कोतवाली चंपावत में तहरीर देकर आरोप लगाया कि 05 मई की रात उसकी 16 वर्षीय पुत्री के साथ तीन लोगों ने दुष्कर्म किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से की जा रही है ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित न होना पड़े और वास्तविक दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक रेखा यादव के निर्देशन में क्षेत्राधिकारी चंपावत की निगरानी में 10 सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर स्थानीय लोगों से जानकारी भी ली है। पुलिस टीम ने घटनास्थल का वैज्ञानिक परीक्षण कराया तथा पीड़िता का मेडिकल परीक्षण और न्यायालय में बयान दर्ज कराए गए हैं।

पुलिस के अनुसार विवेचना में सामने आया कि पीड़िता एक विवाह समारोह में अपनी इच्छा से एक दोस्त के साथ गई थी। घटना के दिन उसकी गतिविधियों और विभिन्न स्थानों पर मौजूदगी की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से हुई है।

पुलिस ने बताया कि चिकित्सीय परीक्षण में किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट, संघर्ष अथवा जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। कुछ गवाहों के बयान भी तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मेल नहीं खाते पाए गए।

पुलिस के अनुसार, नामजद व्यक्तियों विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत की घटनास्थल पर मौजूदगी नहीं पाई गई। तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह पुष्टि हुई कि घटना के समय वे मौके पर नहीं थे।

डिजिटल और फॉरेंसिक जांच जारी

पुलिस के अनुसार, मामले में डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच जारी है। संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों का संकलन भी किया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि यदि जांच में तथ्यों को भ्रामक या मनगढ़ंत पाया जाता है तो संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि महिला एवं बाल अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है, वहीं झूठी और भ्रामक शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय