भीमताल के बहुचर्चित सामूहिक मारपीट मामले में तीन आरोपितों की जमानत खारिज
नैनीताल, 21 अगस्त (हि.स.)। नैनीताल के प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार के न्यायालय ने भीमताल के बहुचर्चित सामूहिक मारपीट और जानलेवा हमले के मामले में तीन आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। न्यायालय ने घायल की चिकित्सीय प्रतिवेदन और चिकित्सक के बयान को देखते हुए माना कि घायल रमेश किरौला की चोटें गंभीर और प्राणघातक प्रकृति की हैं। उल्लेखनीय है कि पूर्व में घायल रमेश किरौला के मारपीट से कोमा की स्थिति में होने के तथ्य को नजरअंदाज करते हुए उसकी गवाही न होने के आधार पर निचली अदालत ने आरोपितों को जमानत दे दी थी, जिस पर उच्च न्यायालय की ओर से कड़ा रुख सामने आया था।
अभियोजन के अनुसार घटना में राहुल रावत, गौरांग रौतेला, अजय कुल्याल, गौरव कुल्याल, आयुष बोरा तथा उनके 10-12 अन्य साथियों ने देर रात भीमताल स्थित एक भोजनालय पर पहुंचकर शटर पीटा और भीतर बैठकर शराब पीने की जिद की। मना करने पर आरोपितों ने भोजनालय के संचालक के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंचे उसके भाई राहुल रैक्वाल पर भी हमला किया गया। आरोप है कि रिपोर्टकर्ता के सिर पर नुकीले हथियार से वार किया गया और होटल के बाहर खड़े वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई।
घटना की सूचना मिलने पर पहुंचे मामा दीपक किरौला और उनके साथी भानु पर भी लाठी-डंडों से हमला किया गया। इसके बाद घायल जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमताल की ओर जा रहे थे तो भीमताल तिराहे के पास आरोपितों ने बोलेरो वाहन रुकवाकर फिर हमला किया। इस दौरान रमेश किरौला और योगेश किरौला को सड़क पर गिराकर लोहे की रॉड, नुकीले हथियार और कड़े से ताबड़तोड़ वार किए गए। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी मारपीट की गई।
रमेश किरौला को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भीमताल, फिर सुशीला तिवारी चिकित्सालय, उसके बाद कृष्णा अस्पताल और अंततः दिल्ली के मैक्स अस्पताल ले जाया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने न्यायालय को बताया कि रमेश किरौला अब भी कोमा की स्थिति में हैं, उनके सिर में फ्रैक्चर सहित गंभीर चोटें पाई गई हैं और उनकी जान को खतरा बना हुआ है।
दोनों पक्षों की दलीलें, चिकित्सीय प्रतिवेदन और चिकित्सक के बयान पर विचार करने के बाद प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार ने तीनों आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। इस प्रकरण में पहले एसीजेएम नैनीताल ने विवेचक की ओर से दायर धारा 109 के रिमांड संबंधी प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया था। इसके विरुद्ध पीड़ित पक्ष उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां रिमांड मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त कर दिया गया। इधर बताया गया है कि इस मामले का एक प्रमुख आरोपित गौरांग रौतेला फरार है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय से उसके विरुद्ध गैर जमानती वारंट भी जारी हुआ है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी