‘ध्वनि प्रदूषण’ पर विशेष जन-जागरूकता परिचर्चा आयोजित
देहरादून, 24 सितंबर (हि.स.)। दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र तथा उत्तराखण्ड अगेंस्ट नॉइज पॉल्यूशन के सहयोग से केन्द्र के सभागार में गुरुवार शाम को ‘ध्वनि प्रदूषण’ विषय पर एक विशेष जन-जागरूकता परिचर्चा आयोजित की गई।
परिचर्चा का उद्देश्य बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के प्रभावों, उससे संबंधित कानूनी प्रावधानों, नागरिकों के अधिकारों तथा शोर की समस्या के समाधान के लिए उपलब्ध व्यावहारिक उपायों के प्रति लोगों को जागरूक करना था। कार्यक्रम में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि ध्वनि प्रदूषण केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि लगातार और अनियंत्रित शोर का प्रभाव व्यक्ति के दैनिक जीवन, कार्यक्षमता, नींद तथा मानसिक शांति पर पड़ सकता है। इसलिए नागरिकों के लिए यह जानना जरूरी है कि शोर की समस्या सामने आने पर वे किस प्रकार व्यवस्थित ढंग से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं और समाधान के लिए संबंधित संस्थाओं तक पहुंच सकते हैं।
कार्यक्रम का संचालन ‘द अननोन इंडिया’ की प्रबंध संपादक सुश्री कीर्ति अहलावत ने किया। उन्होंने स्वागत एवं विषय की भूमिका रखते हुए उपस्थित लोगों से त्वरित संवाद किया और यह समझने का प्रयास किया कि आम नागरिक ध्वनि प्रदूषण की समस्या को किस रूप में देखते हैं तथा शिकायत अथवा समाधान के लिए अब तक क्या कदम उठाते रहे हैं।
नवप्रवर्तन उद्यमी नितिन अहलावत ने ध्वनि प्रदूषण के विभिन्न प्रभावों और इसे नियंत्रित करने में नागरिक सहभागिता की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समस्या को केवल प्रशासन या पुलिस के स्तर पर छोड़ देने के बजाय नागरिकों को भी अपने आसपास के वातावरण के प्रति जिम्मेदारी के साथ सक्रिय होना होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल