आशाओं ने न्यूनतम वेतन, पेंशन और नियमितीकरण की मांग, आंदोलन की चेतावनी

 


नैनीताल, 29 सितंबर (हि.स.)। ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने पिछले कई मंगलवार से जारी अपने आंदोलन के तहत इस मंगलवार भी प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर आशाओं को न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, पेंशन और नियमितीकरण सहित सात सूत्रीय मांगों के समाधान की मांग की।

यूनियन ने मांगें पूरी न होने पर आगामी 24 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन तथा 22 नवंबर को देहरादून में मुख्यमंत्री आवास कूच करने की चेतावनी दी है। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।

ज्ञापन में कहा गया कि ऑल इंडिया स्कीम वर्कर्स फेडरेशन के आह्वान पर आशा कार्यकर्ता सितंबर में प्रत्येक मंगलवार को धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगें उठा रही हैं। यूनियन ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न अभियानों और मातृ-शिशु सुरक्षा के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद आशाओं को न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। ज्ञापन में 31 अगस्त 2021 को खटीमा में हुई वार्ता का उल्लेख करते हुए कहा गया कि आशाओं का मासिक मानदेय 11,500 रुपये किए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।

यूनियन ने 2021 के 11,500 रुपये मासिक मानदेय संबंधी प्रस्ताव को लागू करने, आशाओं को न्यूनतम वेतन व कर्मचारी का दर्जा देने, सेवानिवृत्ति के बाद आजीवन पेंशन का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कर केंद्र को भेजने, सेवानिवृत्ति पर 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि देने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट बढ़ाने और गैर सरकारी संगठनों की भूमिका समाप्त करने की मांग की। इसके अलावा आशाओं की छंटनी रोकने, सरकारी अस्पतालों में उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पद तत्काल भरने की मांग भी की है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी