आशाओं ने न्यूनतम वेतन, नियमितीकरण और पेंशन की मांग उठाई

 


नैनीताल, 15 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, नियमितीकरण और पेंशन समेत 10 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। यूनियन ने कहा है कि अपनी मांगों के समाधान के लिए सितंबर माह में प्रत्येक मंगलवार को स्वास्थ्य केंद्रों और राजकीय चिकित्सालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

यूनियन ने मुख्यमंत्री से वर्ष 2021 में खटीमा में आशाओं के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता के दौरान किए गए 11,500 रुपये मासिक मानदेय के वादे को तत्काल लागू करने, आशाओं को न्यूनतम वेतन और कर्मचारी का दर्जा, सेवानिवृत्ति के बाद अनिवार्य पेंशन का प्रावधान करने, पेंशन लागू होने तक सेवानिवृत्ति के समय 10 लाख रुपये की एकमुश्त राशि, विभिन्न मदों का भुगतान हर महीने करने, प्रशिक्षण और पल्स पोलियो अभियान के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये देने, अस्पतालों में सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने, सरकारी चिकित्सालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पद भरने, सभी अस्पतालों में आशा घर बनाने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का बजट बढ़ाने, एनजीओ की भूमिका समाप्त करने और आशाओं की छंटनी बंद करने की मांग भी रखी गई है।

यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि विधानसभा चुनाव से पूर्व मांगों का समयबद्ध समाधान नहीं किया गया तो राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। यूनियन ने इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होने की बात कही है। आंदोलन में संगठन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल, चंद्रा सती, दुर्गा टम्टा, राधा रानी, मनीषा आर्या, सरिता कुरिया, विकला शाह, कमला बिष्ट, निर्मला चंद्रा व इंदुबाला सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकत्रियां शामिल रहीं।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी