‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत व्यापक अभियान शुरू
हरिद्वार, 15 अप्रैल (हि.स.)। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुपालन में प्राचीन पांडुलिपियों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों एवं दुर्लभ अभिलेखों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ये सभी दस्तावेज भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक चेतना के अमूल्य साक्ष्य हैं, जिनका संरक्षण एवं भावी पीढि़यों तक सुरक्षित हस्तांतरण सामूहिक दायित्व है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है। इस मिशन के अंतर्गत देशभर में उपलब्ध पांडुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रंथों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटल रूपांतरण और व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है, ताकि यह धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए आसानी से उपलब्ध हो सके।
डॉ. मिश्र ने कहा कि उत्तराखंड, जो प्राचीन ज्ञान, दर्शन, साहित्य और संस्कृति की भूमि रहा है, इस अभियान में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कार्यक्रम ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य, डिजिटल इंडिया के विजन तथा विरासत और विकास के राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों एवं अन्य दुर्लभ दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, सूचीकरण (कैटलॉगिंग), संरक्षण एवं डिजिटलीकरण किया जाएगा।
इस संबंध में सभी नागरिकों से अपेक्षा की गई है कि यदि उनके पास कोई भी पांडुलिपि या दुर्लभ दस्तावेज सुरक्षित रूप में उपलब्ध है, तो उसकी प्रति या जानकारी जिला सूचना कार्यालय, देवपुरा चौक, हरिद्वार में उपलब्ध कराएं, ताकि उन्हें डिजिटाइज कर ‘ज्ञान भारतम् पोर्टल’ के माध्यम से आम जनता के लिए सुलभ कराया जा सके।
प्रशासन ने नागरिकों से इस ऐतिहासिक अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील की है, जिससे भारत की प्राचीन ज्ञान संपदा को संरक्षित कर डिजिटल स्वरूप में आने वाली पीढि़यों तक पहुंचाया जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला