बिना इनर लाइन परमिट के आदि कैलाश पहुंचे यात्री, सुरक्षा में चूक

 




पिथौरागढ़/धारचूला, 13 अप्रैल (हि.स.)। उत्तराखंड में 1 मई से प्रस्तावित आदि कैलाश यात्रा शुरू होने से पहले ही नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। बिना इनर लाइन परमिट के श्रद्धालुओं के संवेदनशील क्षेत्र में पहुंचने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आदि कैलाश यात्रा के लिए प्रशासन ने 1 मई से आधिकारिक शुरुआत की तारीख तय की है, लेकिन इससे पहले ही कुछ स्थानीय टूर ऑपरेटर नियमों को दरकिनार कर श्रद्धालुओं को यात्रा पर ले जा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, बिना प्रशासनिक अनुमति और बिना इनर लाइन परमिट के ही यात्रियों को सीमांत क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है, जो कि पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। नियमों के अनुसार, आदि कैलाश यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य होता है और बिना इसके किसी भी श्रद्धालु को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाती। इसके बावजूद यात्रियों का वहां पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक माना जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि अब तक प्रशासन ने इनर लाइन परमिटजारी करने की स्पष्ट तिथि भी घोषित नहीं की है, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

दीपेश नेगी स्थानीय निवासी का कहना है अगर बिना परमिट लोग जा रहे हैं, तो यह सुरक्षा के लिहाज से बहुत गंभीर मामला है। प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और ऐसे टूर ऑपरेटरों पर सख्ती करनी चाहिए। वही उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी ने बताया कि इस मामले पर पर आईटीबीपी को जांच के निर्देश दे दिए गए है । उपरोक्त वीडियो को संज्ञान में लेकर मामले की जांच की जा रही है । भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित आदि कैलाश क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। ऐसे में बिना अनुमति लोगों का वहां पहुंचना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है। अब बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाता है।

हिन्दुस्थान समाचार / संतोष दरियाल