आदि कैलाश–ओम पर्वत दर्शन यात्रा बनी सीमांत क्षेत्र की नई ताकत, आस्था के साथ रोजगार और पर्यटन

 


पिथौरागढ़, 16 मई (हि.स.)। कुमाऊं की प्रसिद्ध आदि कैलाश एवं ओम पर्वत यात्रा का शुभारंभ 1 मई को विधिवत रूप से किया गया। यात्रा प्रारंभ होते ही देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पिथौरागढ़ पहुंच रहे हैं।

उत्तराखंड सरकार ने सीमांत जनपद पिथौरागढ़ को धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन हब के रूप में विकसित करने हेतु निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। मात्र 16 दिनों में ही 10 हजार से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश एवं ओम पर्वत के दर्शन कर चुके हैं।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि स्वरोजगार नीति, पर्यटन नीति व होमस्टे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से सीमांत क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को नई दिशा मिली है। इन योजनाओं के माध्यम से स्थानीय युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों को रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। साथ ही पर्यटन गतिविधियों में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।

सीमांत क्षेत्र के गांवों—गुंजी, कुटी, नाभी सहित अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए सड़क, स्वास्थ्य, सुरक्षा, आवास, संचार एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का लगातार विस्तार किया गया है। यात्रा को सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन द्वारा बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जिससे यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

उन्हाेंने बताया कि पिछले वर्ष आदि कैलाश यात्रा में लगभग 40 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जबकि इस वर्ष 1 मई 2026 से 16 मई 2026 तक मात्र 16 दिनों में ही 10 हजार से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश एवं ओम पर्वत के दर्शन कर चुके हैं। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या पिथौरागढ़ में बढ़ते धार्मिक पर्यटन व लोगों की आस्था का स्पष्ट प्रमाण है।

उन्हाेंने बताया कि आदि कैलाश यात्रा से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है। विशेष रूप से होमस्टे, होटल व्यवसाय, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प एवं परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को इसका सीधा लाभ मिल रहा है। सीमांत क्षेत्रों में संचालित होमस्टे में इस वर्ष विशेष रौनक देखने को मिल रही है, जिससे स्थानीय लोगों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

आदि कैलाश–ओम पर्वत यात्रा अब केवल धार्मिक आस्था का ही केंद्र नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्रों के आर्थिक विकास, स्वरोजगार एवं पर्यटन आधारित आजीविका का एक मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचने से सीमांत क्षेत्र विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल