हैपेटाइटिस रोग के जांच एवं उपचार राजकीय अस्पतालों में निशुल्क उपलब्ध

 


जयपुर, 28 जुलाई (हि.स.)।चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढीकरण एवं राष्ट्रीय कार्यक्रमों के निर्धारित लक्ष्यों को अर्जित करने की दिशा में लगातार प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय वायरल हैपेटाईटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत प्रदेशभर में वर्ष 2030 तक हैपेटाइटिस सी का उन्मूलन के लिए प्रो-एक्टिव एप्रोज के साथ जांच, उपचार गतिविधियां की जा रही हैं।

विश्व हैपेटाईटिस दिवस के अवसर पर प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड ने बताया कि प्रदेश में हेपेटाइटिस बी तथा हेपेटाइटिस सी के नियंत्रण व रोकथाम के लिए जाच एवं उपचार चिन्हित राजकीय चिकित्सा संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध हैं। इसके बचाव के लिए उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों तथा स्वास्थ्य कार्यकताओं को हेपेटाइटिस बी का वैक्सीन लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हैपेटाइटिस बी का मां से बच्चे में संक्रमण होने का सबसे बड़ा कारण है इसके लिए स्वास्थ्य केन्द्रों पर आने वाली सभी गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस बी की जांच आवश्यक रुप से की जाती है। यदि गर्भवती महिला हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव है तो प्रसव चिकित्सा केंद्र पर दक्ष चिकित्सक की निगरानी में किया जाता है। प्रदेश में नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर से बचाव के लिए राज्य सरकार द्वारा एक नवाचार प्रारम्भ करते हुए मिशन लिवर स्माईल कार्यक्रम संचालित किया गया है।

मिशन निदेशक एनएचएम डॉ जोगाराम ने बताया कि नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस बी से बचाने के लिए बच्चे को जन्म के 24 घंटों के भीतर हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाना आवश्यक होता है। गर्भवती यदि हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव है तो होने वाले बच्चे को जन्म के समय हेपेटाइटिस बी इम्यूनोग्लोबुलिन लगाकर हेपेटाइटिस बी से बचाया जा सकता है। साथ ही यह भी ध्यान दें कि टैटू बनाते समय नई सुई और स्याही तथा साफ उपकरण प्रयोग में लिया जाना आवश्यक है।

मिशन निदेशक ने बताया कि हैपेटाईटिस नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत हैपेटाइटिस जांच एवं वायरल लोड के लिये चार राज्य स्तरीय लैब जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर एवं 42 जिलों में 50 लैब मेडिकल कॉलेज/जिला अस्पताल/उप जिला अस्पताल/ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र/ डीटीसी में एनवीएचसीपी लैब का संचालन किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित