स्विट्जरलैंड के किसान एग्रो टूरिज्म के जरिए क्षेत्र के हुए कृषि शोध व अनुसंधान से हुए रुबरु

 


बीकानेर, 20 जनवरी (हि.स.)। स्विट्जरलैंड के प्रगतिशील किसानों के 20 सदस्यीय दल ने मंगलवार को स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय में संचालित अखिल भारतीय शुष्क क्षेत्रीय फल समन्वित अनुसंधान परियोजना (खजूर फल) का भ्रमण किया। इन किसानों को खजूर की खेती पर किए गए अनुसंधान, परिणाम , जलवायु परिस्थितियां, उत्पादकता व गुणवत्ता सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

परियोजना प्रभारी डॉ राजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में खजूर अनुसंधान की दिशा में विश्वविद्यालय द्वारा सफल प्रयोग किया गया। पश्चिमी राजस्थान की अतिवादी जलवायुवीय परिस्थितियों और क्षारीय पानी की समस्या के बीच किसानों की आर्थिक मजबूती की दिशा में यह अनुसंधान सफल रहा है। उन्होंने विदेशी प्रगतिशील किसानों को खजूर की किस्मों, परागण तकनीक, कीट प्रबंधन, फलों की सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।

अनुसंधान निदेशक डॉ विजय प्रकाश ने बताया कि स्विट्जरलैंड से आए प्रगतिशील किसानों के दल का उद्देश्य एग्रो टूरिज्म के माध्यम से देश के कृषि अनुसंधान, डेयरी फार्मिंग और संस्कृति की जानकारी लेना है। दल ने विश्वविद्यालय के इस अनुसंधान की सराहना की।

दल प्रभारी मार्गेट कैथरीन ने बताया कि सि्वजरलैड में खजूर की खेती नहीं होती। यह जानकारी उनकी टीम के लिए बेहद ज्ञानवर्धक व प्रेरक रही है। इस दौरान क्षेत्रीय निदेशक अनुसंधान डॉ एच एल देशवाल भी उपस्थित रहे। विदेशी प्रगतिशील किसानों ने खजूर की विभिन्न किस्मों को करीब से देखा तथा उनकी उत्पादन परिस्थितियों व सुरक्षा प्रबंधन से जुड़े प्रश्न किए जिनका विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों के द्वारा प्रत्युत्तर दिया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव