सुलतान शाह बावड़ी पर चला पीला पंजा, शाहपुरा बना छावनी, भारी सुरक्षा के बीच हटा वर्षों पुराना अतिक्रमण

 








भीलवाड़ा, 02 जुलाई (हि.स.)। भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा शहर में गुरुवार का दिन प्रशासनिक सख्ती, सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम और बहुप्रतीक्षित कार्रवाई के नाम रहा। पुराने बस स्टैंड के पास स्थित सुलतान शाह की बावड़ी क्षेत्र में नगर पालिका शाहपुरा ने वर्षों से चले आ रहे विवादित अतिक्रमण पर बड़ा प्रहार करते हुए पीला पंजा चला दिया। सुबह से ही प्रशासनिक अमला पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर गया और कड़ी सुरक्षा के बीच विवादित क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया। पूरे दिन शहर में तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित माहौल बना रहा।

कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे इलाके को मानो छावनी में तब्दील कर दिया। विवादित स्थल के चारों ओर मजबूत बैरिकेडिंग की गई। मीडिया कर्मियों और आम लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। अतिक्रमण हटाने के तुरंत बाद प्रशासन ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीमेंट के खंभे गाड़कर कांटेदार तारों से फेंसिंग कर दी।

संभावित संवेदनशीलता को देखते हुए शाहपुरा उपखंड अधिकारी सुनील मीणा ने बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी। प्रशासन ने साफ कर दिया कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सिर्फ विवादित स्थल ही नहीं, बल्कि शहर के प्रमुख चैराहों पर भी बैरिकेडिंग की गई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस के वज्र वाहन और आर्मर यूनिट के जवान तैनात रहे। शहर में लगातार पुलिस गश्त चलती रही और हर गतिविधि पर वरिष्ठ अधिकारियों की पैनी नजर बनी रही।

सुबह बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शहर काजी सैयद शराफत अली और वक्फ कमेटी सदर हमीद खान कायमखानी के नेतृत्व में हाथों में संविधान की प्रतियां लेकर विवादित स्थल की ओर बढ़े। समाज के लोगों का उद्देश्य अपनी बात प्रशासन तक शांतिपूर्ण ढंग से पहुंचाना था। लेकिन पुलिस ने उन्हें त्रिमूर्ति चाैराहे पर ही रोक दिया। इसके बाद समाज के लोग वहीं बैठ गए और स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण दिखाई देने लगी। मौके पर मौजूद डीएसपी ओमप्रकाश विश्नोई और थाना प्रभारी सुरेश चंद्र शर्मा ने समझाइश करते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। प्रशासनिक वार्ता और समझाइश के बाद लोग वहां से शांतिपूर्वक हट गए। बाद में समाज का एक चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शाहपुरा थाने पहुंचा, जहां अधिकारियों के साथ विस्तृत वार्ता हुई।

प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लिया। विवादित क्षेत्र के आसपास मौजूद इमारतों और मकानों की छतों से लोगों को हटाया गया। कई संवेदनशील छतों पर सशस्त्र पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई ताकि ऊपर से किसी प्रकार की भीड़, पत्थरबाजी या अन्य अप्रिय गतिविधि की आशंका समाप्त की जा सके। वीर माता मानिक कंवर विद्यालय से त्रिमूर्ति चैराहा और उदयभान गेट तक विशेष बैरिकेडिंग कर आवागमन रोक दिया गया। आसपास स्थित बैंकों और कार्यालयों के कर्मचारियों को भी विवादित क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।

उल्लेखनीय है कि सुलतान शाह की बावड़ी के आसपास की भूमि लंबे समय से विवाद का केंद्र बनी हुई थी। इस भूमि पर वक्फ कमेटी और नगर पालिका शाहपुरा के बीच स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही थी। वक्फ कमेटी ने करीब एक बीघा 10 बिस्वा भूमि पर अपना दावा जताया था। मामला राजस्थान वक्फ ट्रिब्यूनल पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने बड़ा फैसला सुनाया। ट्रिब्यूनल ने वक्फ कमेटी के बड़े दावे को खारिज करते हुए केवल 9 गुणा 22 फीट भूमि पर उनका अधिकार माना। इसके बाद नगर पालिका के लिए कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।

नगर पालिका ने कार्रवाई से पहले सार्वजनिक नोटिस जारी कर संबंधित लोगों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। नोटिस के बाद कुछ सब्जी विक्रेताओं ने अपने अस्थायी ढांचे हटाने शुरू भी कर दिए थे। हालांकि विवादित हिस्से में कई अस्थायी निर्माण, केबिनें और कथित धार्मिक ढांचे मौजूद रहे, जिन्हें हटाने के लिए आखिरकार प्रशासन को मशीनरी का सहारा लेना पड़ा।

कार्रवाई शुरू होने के दौरान वक्फ कमेटी के सदर हमीद खान अपने अधिवक्ता ताज मोहम्मद के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन से कहा कि वे संबंधित मजारों को सम्मानपूर्वक हटाने के लिए तैयार हैं, लेकिन थोड़ा समय चाहिए। प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए लगभग एक घंटे तक इंतजार किया और कहा कि यदि हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए तो सहयोग किया जाएगा। लेकिन निर्धारित समय में कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होने पर प्रशासन ने जेसीबी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

कुछ ही देर में जेसीबी मशीनों ने विवादित क्षेत्र में बने कच्चे निर्माणों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। कार्रवाई के दौरान आधा दर्जन कथित मजारों को हटाया गया। इसके अलावा शेष भूमि पर बनी अस्थायी सब्जी मंडी की केबिनों और अन्य कब्जों को भी ध्वस्त कर दिया गया। पीले पंजे की गर्जना के साथ वर्षों पुराना कब्जा धीरे-धीरे साफ होता गया।

कार्रवाई की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलेभर से करीब 200 पुलिस जवानों का जाब्ता बुलाया गया। मौके पर एएसपी राजेश आर्य, डीएसपी ओमप्रकाश विश्नोई, थाना प्रभारी सुरेश शर्मा, नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी प्रकाश साहू, तहसीलदार भीवंराज परिहार सहित पुलिस, राजस्व और नगर पालिका के अधिकारी मौजूद रहे।

एएसपी राजेश आर्य ने बताया कि पूरी कार्रवाई वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश की पालना में की गई है और शांति बनाए रखना प्राथमिकता रही।

वहीं नगर पालिका अधिशाषी अधिकारी प्रकाश साहू ने कहा कि 9 गुणा 22 फीट भूमि को छोड़कर शेष पूरी भूमि अतिक्रमण मुक्त करा ली गई है।

सुलतान शाह बावड़ी पर हुई यह कार्रवाई पूरे शाहपुरा शहर में चर्चा का विषय बनी रही। लंबे समय से विवादों में घिरी भूमि पर प्रशासन की निर्णायक कार्रवाई ने साफ संदेश दिया कि न्यायालय के आदेशों की पालना हर हाल में होगी। गुरुवार की यह कार्रवाई शाहपुरा प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा थी। जिसे प्रशासन ने सख्ती, रणनीति और संयम के साथ सफलतापूर्वक पूरा कर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद