साधना से ही साकार होगा सावन बनने का संकल्प: बाबा उमाकान्त महाराज
जयपुर, 01 अगस्त (हि.स.)। संत बाबा उमाकान्त महाराज ने कहा कि श्रावण केवल एक माह नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 'सावन' का अर्थ है 'सा बन', अर्थात सतपुरुष या प्रभु के समान बनने का प्रयास करना। यदि मनुष्य समर्थ गुरु से नामदान लेकर नियमित साधना करे तो वह भी प्रभु तक पहुंचने का मार्ग प्राप्त कर सकता है।
सत्संग में बाबा उमाकान्त महाराज ने भारतीय पंचांग के बारह महीनों और उनकी आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि चैत्र से लेकर फाल्गुन तक प्रत्येक माह का अपना विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा), श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन), शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा और फाल्गुन पूर्णिमा जैसे पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं।
उन्होंने कहा कि आषाढ़, सावन और भाद्रपद वर्षा ऋतु के प्रमुख महीने हैं। जिस प्रकार वर्षा के जल से खेत में पड़ा बीज अंकुरित होकर फलदायी वृक्ष बनता है, उसी प्रकार मनुष्य जीवन भी साधना के माध्यम से आध्यात्मिक उन्नति कर सकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीव इस संसार में प्रभु तक पहुंचने और अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त करने की संभावना लेकर आता है।
बाबा उमाकान्त महाराज ने कहा कि मनुष्य जन्म का उद्देश्य केवल सांसारिक जीवन जीना नहीं, बल्कि साधना के माध्यम से ईश्वर की ओर अग्रसर होना है। उन्होंने शुकदेव जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य माया और काल के बंधनों में फंस जाता है, लेकिन समर्थ गुरु के मार्गदर्शन में सुमिरन, ध्यान और भजन करने से इन बंधनों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश