श्रीगंगानगर में ‘सैम’ बना सियासी और प्रशासनिक चिंता, 40 करोड़ से ज्यादा के राहत कार्य जारी

 


जयपुर, 04 फ़रवरी (हि.स.)। श्रीगंगानगर जिले में ‘सैम’ अब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि किसानों, मकानों और खेती के भविष्य से जुड़ा गंभीर संकट बन चुका है। विधानसभा में बुधवार को यह मुद्दा तब प्रमुखता से उठा, जब भूजल मंत्री कन्हैया लाल ने स्वीकार किया कि जिले के तीन विधानसभा क्षेत्र रायसिंहनगर, सूरतगढ़ और करणपुर सैम की चपेट में हैं।

मंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि भवनों व कृषि पर सैम के प्रभाव का अध्ययन करने और समाधान सुझाने के लिए जिला कलेक्टर श्रीगंगानगर द्वारा बहु-विभागीय जांच समिति गठित की गई है।

प्रश्नकाल में विधायक रूपिन्द्र सिंह कुन्नर के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री ने बताया कि पदमपुरा और संगीता क्षेत्र में ड्रेन निर्माण कार्य चल रहा है, इंदिरा गांधी नहर की रीलाइनिंग भी की जा रही है, ताकि नहरों से होने वाले रिसाव और जलभराव की समस्या पर काबू पाया जा सके। उन्होंने बताया कि पंजाब के सैम प्रभावित इलाकों का भी अध्ययन किया जाएगा, ताकि वहां अपनाए गए प्रबंधन उपायों को श्रीगंगानगर में लागू किया जा सके। साथ ही भूजल स्तर की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

भूजल मंत्री ने सैम के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नहरों से पानी का रिसाव, बारिश का पानी जमा होना, पंजाब के मुक्तसर जिले में बार-बार बाढ़, सतलुज, रावी और व्यास नदियों में रिकॉर्ड बारिश का असर दक्षिण-पश्चिम दिशा में बढ़ते जलस्तर के रूप में श्रीगंगानगर पर पड़ा, जिससे करणपुर क्षेत्र में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनी।

मंत्री ने सदन को बताया कि रायसिंहनगर के 23 गांव 10 हजार 584.98 बीघा क्षेत्र सैम प्रभावित, सूरतगढ़ के 15 गांव 2,450.72 बीघा क्षेत्र प्रभावित, करणपुर के 17 गांव, 6,432 बीघा क्षेत्र प्रभावित है। जहां रायसिंहनगर और सूरतगढ़ में फसल खराबा फिलहाल शून्य है, वहीं करणपुर में 1,825 बीघा फसल खराबा दर्ज किया गया है, जो वर्ष 2025 से सैम प्रभावित है।

भूजल मंत्री ने बताया कि

आरडब्ल्यूएसआरपीडी योजना के तहत नहर रीलाइनिंग से अब तक 10,345 बीघा क्षेत्र को सैम से मुक्त किया जा चुका है। वर्तमान में 40.64 करोड़ रुपये की लागत से दो बड़े ड्रेनेज कार्य प्रगतिरत हैं, जिन्हें जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके अलावा भोपालपुरा (एक एलएम) क्षेत्र में इंदिरा गांधी मुख्य नहर की शेष दो किमी रीलाइनिंग आगामी नहर बंदी (अप्रैल–मई) में कराई जाएगी। श्रीगंगानगर में सैम की समस्या को हल करने के लिए सरकार नीति, बजट और तकनीक तीनों मोर्चों पर सक्रिय है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित