शिक्षा विभाग की नीतियों के विरोध में शैक्षिक महासंघ का आंदोलन का ऐलान

 


जयपुर, 10 मई (हि.स.)। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली, शिक्षकों की लंबित समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अव्यवस्थाओं के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन का शंखनाद किया है। रविवार को जयपुर में प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा के नेतृत्व में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन ने सरकार और विभागीय अधिकारियों पर शिक्षकों की समस्याओं की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाया।

प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने कहा कि सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की हठधर्मिता के कारण शिक्षकों के ज्वलंत मुद्दों का समाधान नहीं हो पा रहा है। संगठन ने शिविरा पंचांग में संशोधन, तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के स्थानांतरण, पदोन्नति, क्रमोन्नत विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति, स्टाफिंग पैटर्न लागू करने, आरजीएचएस व्यवस्था को सुचारू रखने, वेतन विसंगतियां दूर करने और संविदा शिक्षकों को नियमित करने जैसी मांगों को प्रमुख बताया।

महासंघ ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग “नवाचार” के नाम पर शिक्षा, शिक्षक और विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। संगठन के अनुसार ग्रीष्मकालीन अवकाशों में कटौती, पदस्थापन में मनमानी, पीएमश्री विद्यालयों में दोहरे मापदंड और गैर-शैक्षणिक कार्यों का अत्यधिक बोझ शिक्षकों में रोष का कारण बना हुआ है।

संघर्ष समिति के संयोजक सम्पत सिंह ने कहा कि एक ओर केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों में 56 से 61 दिन तक ग्रीष्मावकाश दिए जा रहे हैं, वहीं राजस्थान के माध्यमिक और प्रारंभिक विद्यालयों में अवकाश घटाकर 35 दिन कर दिए गए हैं। उन्होंने इसे भौगोलिक परिस्थितियों के विपरीत और अव्यावहारिक बताया।

महासंघ ने यह भी आरोप लगाया कि गृह जिलों में पद रिक्त होने के बावजूद शिक्षकों को दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है तथा काउंसलिंग प्रक्रिया में निर्धारित 125 प्रतिशत पद नहीं खोलकर मनमानी की जा रही है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण और पदोन्नति वर्षों से लंबित होने पर भी नाराजगी जताई गई।

शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों को लेकर महासंघ ने कहा कि जनगणना, ऑनलाइन हाजिरी और विभिन्न पोर्टलों के दबाव के कारण शिक्षक विद्यार्थियों और शिक्षण कार्य से दूर हो रहे हैं। कई विद्यालयों में सभी शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगा दी गई है, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने बताया कि संगठन 14 मई को खंड स्तर, 29 मई को जिला स्तर, 5 जून को बीकानेर निदेशालय पर संभाग स्तर और 10 जून को जयपुर संभाग स्तर पर धरना-प्रदर्शन करेगा। इसके बाद 18 जून से प्रदेश स्तरीय क्रमिक धरना शुरू किया जाएगा तथा मानसून सत्र में विधानसभा घेराव किया जाएगा।

महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और विभाग ने शीघ्र समाधान नहीं किया तो प्रदेशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश