व्यावहारिक दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए संहिताओं का अध्ययन: खांडल
चरकायतन प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में संहिता अध्ययन एवं संस्कृत की उपयोगिता पर किया मार्गदर्शन
जोधपुर, 12 अगस्त (हि.स.)। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविन्द सहाय शुक्ल के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के तत्वावधान में छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चरकायतन का आयोजन किया जा रहा है। गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान आदि देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में सहभागिता की है।
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को आरोग्यलक्ष्मी आयुर्वेद चिकित्सा केंद्र जयपुर के निदेशक वैद्य श्रीकृष्ण खांडल, महाराष्ट्र के वैद्य जयप्रकाश राम, गुजरात के वैद्य एसएन गुप्ता एवं डॉ. देवेंद्र चाहर ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को विशिष्ट व्याख्यान दिया। विशेषज्ञों ने वर्तमान समय में होने वाली विभिन्न व्याधियों के कारणों तथा उनके आयुर्वेदिक परिप्रेक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की। आयुर्वेद के प्रख्यात आयुर्वेदविज्ञ वैद्य श्रीकृष्ण खांडल ने चरक संहिता से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों, सिद्धांतों एवं चिकित्सकीय दृष्टिकोणों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने कहा कि संहिताओं का अध्ययन केवल पाठ्यक्रम की दृष्टि से नहीं, बल्कि चिकित्सकीय, शोधपरक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने संहिता अध्ययन में संस्कृत भाषा की प्रभावी भूमिका पर विशेष जोर देते हुए संस्कृत टीकाओं, श्लोकों एवं छंदों के अध्ययन की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद की मूल अवधारणाओं एवं सिद्धांतों को उनके वास्तविक संदर्भ में समझने के लिए संस्कृत से विमुख होने के बजाय संस्कृत का उपयोग करते हुए संहिताओं का अध्ययन किया जाना चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश