राज्य सरकार जनजाति संस्कृति को कर रही संरक्षित, ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट से बढ़ेगा पर्यटन : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
जयपुर, 09 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जनजाति संस्कृति हमारे समाज की अमूल्य धरोहर है और राज्य सरकार इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। पं. दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के संकल्प को आत्मसात करते हुए सरकार जनजाति समाज के समग्र उत्थान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में जनजाति विकास के हितधारकों के साथ बजट पूर्व चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं का समाज से गहरा जुड़ाव होता है और वे जनजाति क्षेत्रों की आवश्यकताओं और चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझती हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्राप्त सुझावों का विश्लेषण कर उन्हें आगामी बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा, जिससे प्रदेश में जनजाति कल्याण को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजाति संस्कृति और वैभव के संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दे रही है। जनजाति क्षेत्र की राजीविका महिलाओं द्वारा निर्मित फूलों की गुलाल की सरकारी खरीद कर आजीविका संवर्धन को प्रोत्साहित किया गया है। इसके साथ ही बेणेश्वर धाम और मानगढ़ धाम को ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर स्थित बेणेश्वर धाम में लगने वाले विशाल आदिवासी मेले को और भव्य बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी को जनजाति इतिहास और संस्कृति से जोड़ा जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर वर्ष 2023 में पीएम-जनमन अभियान शुरू किया गया। इसके तहत 9 मंत्रालयों की 11 योजनाओं का एकीकृत क्रियान्वयन कर जनजाति समाज को लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बारां जिले में इस अभियान के अंतर्गत लगभग 11 हजार प्रधानमंत्री आवास, 16 हजार से अधिक विद्युत कनेक्शन, 3 हजार 760 पेयजल कनेक्शन, 12 मल्टी परपज सेंटर और 11 संपर्क सड़कों के कार्य पूरे हो चुके हैं। साथ ही 21 नए छात्रावास, 51 नए आंगनबाड़ी केंद्र और 51 नए वन धन केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत पक्के मकान, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी सुविधाओं के माध्यम से जनजाति बहुल गांवों का सर्वांगीण विकास किया जा रहा है। इस अभियान में राज्य के 6 हजार से अधिक गांव चयनित किए गए हैं, जिससे लगभग 55 लाख जनजाति नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार होगा। इसके अतिरिक्त आदि कर्मयोगी अभियान के तहत अब तक 1 लाख 17 हजार से अधिक कर्मयोगियों, आदि सहयोगियों और आदि साथियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गत बजट में जनजाति विकास कोष की राशि एक हजार करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक हजार 750 करोड़ रुपये की गई। डूंगरपुर और बांसवाड़ा में डूंगर बरंडा एवं बांसिया चारपोटा में जनजाति नायकों के स्मारक तथा उदयपुर में वीर बालिका कालीबाई संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में जनजाति क्षेत्रों में 9 आश्रम छात्रावास, 3 आवासीय विद्यालय, एक नया खेल छात्रावास और 240 नए मां-बाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। छात्रावासों और आवासीय विद्यालयों में मैस भत्ता बढ़ाकर 3,250 रुपये प्रतिमाह किया गया है। साथ ही खरीफ एवं रबी 2025-26 में 50 हजार जनजाति कृषकों को सब्जी बीज मिनीकिट उपलब्ध कराए गए हैं।
बैठक में उदयपुर, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, सलूंबर, बारां और सिरोही सहित विभिन्न जिलों से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं और संस्थाओं ने शिक्षा, चिकित्सा, आधारभूत संरचना, रोजगार, सिंचाई सहित जनजाति कल्याण से जुड़े विषयों पर सुझाव प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी, अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन अभय कुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय अखिल अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव जनजाति क्षेत्रीय विकास कुंजी लाल मीणा, प्रमुख शासन सचिव वित्त वैभव गालरिया सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और जनजाति क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर