राज्य मंत्रिमण्डल-मंत्रिपरिषद बैठक : सेमी कण्डक्टर, डाटा सेंटर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा प्रोत्साहन

 




जयपुर, 22 मई (हि.स.)। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आयोजित मंत्रिमण्डल एवं मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठकों में राज्य के औद्योगिक विकास, जल संरक्षण, ग्रामीण विकास, ऊर्जा प्रबंधन तथा कार्मिक-पेंशनर्स कल्याण से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए। बैठकों में प्रदेश को विकसित राजस्थान@2047 के विजन के अनुरूप वैश्विक औद्योगिक हब बनाने की दिशा में नई राजस्थान इण्डस्ट्रियल डवलपमेंट पॉलिसी को मंजूरी प्रदान की गई। इसके साथ ही अक्षय ऊर्जा, सर्कुलर इकोनॉमी, जल संरक्षण, गांवों के मास्टर प्लान, बिजली-पानी की उपलब्धता और औद्योगिक निवेश जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की गई।

बैठक के बाद आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत तथा ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर ने मंत्रिमण्डल के फैसलों की जानकारी दी।

बैठक की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन द्वारा एग्रीकोला मेडल से सम्मानित किए जाने पर अभिनंदन प्रस्ताव से हुई। मंत्रिपरिषद ने इसे देश, किसानों और पशुपालकों के लिए गौरव का विषय बताते हुए प्रधानमंत्री को बधाई दी। बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री ने यह सम्मान देश के किसानों और पशुपालकों को समर्पित किया है।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि नई राजस्थान इण्डस्ट्रियल डवलपमेंट पॉलिसी “4जी”—ग्रीन, गवर्नेंस, ग्रोथ और ग्लोबलाइजेशन के चार रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है। नीति का उद्देश्य वर्ष 2028-29 तक राजस्थान की अर्थव्यवस्था को 350 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। इसके तहत पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक उत्पादन, अक्षय ऊर्जा और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि नीति के माध्यम से रीको और नॉन-रीको क्षेत्रों में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की स्थापना के लिए नई योजनाएं शुरू की जाएंगी। साथ ही, इंटीग्रेटेड रिसोर्स रिकवरी पार्क विकसित किए जाएंगे। दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) में नोड आधारित औद्योगिक पार्कों के विकास की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। सरकार फास्ट ट्रैक अप्रूवल, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, प्लग एंड प्ले सुविधाओं और औद्योगिक आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगी।

राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि नीति के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर विश्वस्तरीय औद्योगिक ढांचा तैयार किया जाएगा। एमएसएमई, ओडीओपी और निर्यात गतिविधियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, डाटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाएगा। जैम्स एंड ज्वैलरी, टेक्सटाइल, पर्यटन, हस्तशिल्प, एग्रो प्रोसेसिंग, डेयरी और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह नीति रिसर्च एंड डवलपमेंट तथा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर आधारित होगी, जिससे राज्य में निवेश और स्वदेशी उत्पादन को नई गति मिलेगी।

जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि मंत्रिपरिषद की बैठक में “वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान” की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। यह अभियान गंगा दशमी यानी 25 मई से विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून तक चलाया जाएगा। अभियान की शुरुआत नदियों, बांधों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों पर पूजन तथा नहरों एवं खालों की डी-सिल्टिंग से होगी। उन्होंने कहा कि जिला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत और ग्राम स्तर के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में जल स्रोतों, तालाबों और जल संग्रहण संरचनाओं पर स्वच्छता अभियान, श्रमदान और दीप प्रज्ज्वलन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सभी प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में अभियान की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग करेंगे।

रावत ने बताया कि “हरियालो राजस्थान” अभियान के अंतर्गत घास बुआई और पौधारोपण की अग्रिम तैयारियां भी की जाएंगी। ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर जल चौपाल आयोजित कर जल संरक्षण और जल संग्रहण के उपायों पर चर्चा होगी। साथ ही ड्रिप, स्प्रिंकलर और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों पर कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। किसान चौपाल और कृषि विज्ञान केंद्रों पर भी संगोष्ठियां होंगी। उन्होंने बताया कि 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर जिला स्तरीय समापन समारोहों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले भामाशाहों, पंचायतों, नगर निकायों, संस्थाओं और जल योद्धाओं को “जल गौरव सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा।

ऊर्जा राज्यमंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने “मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-शहरी वार्ड अभियान” की प्रगति की समीक्षा भी की। यह अभियान 19 मार्च 2026 से 15 मई 2026 तक प्रदेश की 457 पंचायत समितियों की 14 हजार 403 ग्राम पंचायतों तथा 309 नगरीय निकायों के 10 हजार 245 वार्डों में संचालित किया गया। अभियान के दौरान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आमजन, महिलाओं, युवाओं, किसानों, कारीगरों और दिव्यांगजनों से उनकी आवश्यकताओं और विकास संबंधी सुझाव लिए गए।

उन्होंने बताया कि प्राप्त सुझावों और बेसलाइन आंकड़ों के आधार पर ड्राफ्ट मास्टर प्लान तैयार किए गए हैं। इन मास्टर प्लान के अनुमोदन के लिए आगामी 26 मई को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के माध्यम से गांवों और शहरी वार्डों के विकास को व्यवस्थित दिशा मिलेगी।

बैठक में भीषण गर्मी को देखते हुए पेयजल और बिजली की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। हीरालाल नागर ने बताया कि इस वर्ष 20 मई को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 16 हजार 487 मेगावाट दर्ज की गई, जबकि उपलब्धता 16 हजार 580 मेगावाट रही। उन्होंने कहा कि मांग से अधिक बिजली उपलब्ध होना राज्य सरकार की प्रभावी और दूरदर्शी ऊर्जा प्रबंधन नीति का प्रमाण है।

उन्होंने बताया कि गर्मी शुरू होने से पहले राज्य सरकार ने विशेष अभियान चलाकर हैंडपंपों और नलकूपों की मरम्मत करवाई। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि आमजन को पेयजल और बिजली के लिए किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सभी प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में नियमित समीक्षा करेंगे तथा हेल्पलाइन नंबर 181 पर प्राप्त बिजली और पेयजल संबंधी शिकायतों का 24 घंटे में समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

मंत्रिमण्डल ने राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 में महत्वपूर्ण संशोधनों को भी मंजूरी दी। राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि संशोधित नियम 67 के तहत विशेष योग्यजन बच्चों को अब स्थायी विकलांगता प्रमाण पत्र केवल एक बार प्रस्तुत करना होगा। पहले यह प्रमाण पत्र हर तीन वर्ष में देना अनिवार्य था।

उन्होंने बताया कि नियम 134 में संशोधन के बाद पेंशनर्स अब मोबाइल एप के माध्यम से फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक द्वारा वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकेंगे। साथ ही, अब राजपत्रित अधिकारियों के अलावा अराजपत्रित कार्मिकों (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़कर) को भी एसएसओ आईडी के माध्यम से जीवन प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार दिया गया है। परिवार पेंशन के लिए प्रमाणीकरण प्रक्रिया को भी सरल बनाते हुए अब दो की बजाय केवल एक राजपत्रित अधिकारी या सम्मानित व्यक्ति का प्रमाणीकरण पर्याप्त होगा। मंत्रिमण्डल ने राजस्थान कृषि अधीनस्थ सेवा नियम-1978 की अनुसूची में वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक के नए पदनाम को शामिल करने का भी निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि इससे विभागीय कर्मचारियों को पदोन्नति के अतिरिक्त अवसर मिलेंगे और कार्य गुणवत्ता में सुधार होगा।

औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रिमण्डल ने जैसलमेर जिले में मैसर्स डालमिया सीमेंट को 121.42 हेक्टेयर भूमि आवंटन की मंजूरी दी। यहां करीब 3 हजार 47 करोड़ रुपये के निवेश से 3.6 मिलियन टन वार्षिक क्षमता वाला सीमेंट संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना से लगभग 820 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अतिरिक्त मैसर्स जे.के. सीमेंट लिमिटेड को जैसलमेर जिले के विभिन्न गांवों में प्रस्तावित रेलवे लाइन के लिए 71.37 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक प्रयोजन हेतु आवंटित करने का निर्णय लिया गया। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय औद्योगिक ढांचे को मजबूती मिलेगी और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

मंत्रिमण्डल ने जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर जिलों में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन को भी मंजूरी दी। सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं से प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, राजस्व में वृद्धि होगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पारीक