राजस्थानी भाषा को अनिवार्य विषय व राजभाषा घोषित करने की मांग

 


जोधपुर, 30 जुलाई (हि.स.)। राजस्थानी भाषा की मान्यता को लेकर संघर्षरत संस्था राजस्थानी मोट्यार परिषद की ओर से आज मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्राधिकरण के राज्य मंत्री ओंकार सिंह लखावत को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में राजस्थान के सभी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में लागू करने, रीट सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी भाषा को शामिल करने तथा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 345 के तहत राजस्थानी भाषा को राजस्थान की राजभाषा घोषित करने की मांग की गई।

परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष जगदीश मेघवाल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय की भावना के अनुरूप राज्य सरकार को शीघ्र प्रभाव से आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए। साथ ही, राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने के लिए केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी पहल करने का भी आग्रह किया गया। परिषद ने कहा कि राजस्थानी भाषा राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और जनभावनाओं की आत्मा है।

वर्ष 2003 में राजस्थान विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के बावजूद आज तक राजस्थानी भाषा को अपेक्षित संवैधानिक एवं प्रशासनिक सम्मान नहीं मिल पाया है। अब समय आ गया है कि राज्य सरकार इस दिशा में ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए। परिषद ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री प्रदेशवासियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए राजस्थानी भाषा के संरक्षण, संवर्धन तथा संवैधानिक सम्मान के लिए आवश्यक निर्णय लेंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश