राजस्थान में पंचायत चुनाव का रण शुरू, पहले चरण के नामांकन शुरू, टिकटों पर भाजपा-कांग्रेस में मंथन
जयपुर, 08 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव का सियासी रण अब जमीन पर उतर गया है। पहले चरण के जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए गुरुवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई। पहले चरण में 16 जिलों में जिला परिषद सदस्यों और 104 पंचायत समितियों के सदस्यों के चुनाव होंगे। जिला परिषद सदस्यों के लिए जिला स्तर पर, जबकि पंचायत समिति सदस्यों के लिए संबंधित उपखंड स्तर पर नामांकन दाखिल किए जाएंगे।नामांकन की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर निर्धारित की गई है।
पहले चरण के साथ ही गांवों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि अभी तक भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दोनों दलों में दावेदारों के नामों को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। जिला परिषद सदस्यों में से ही जिला प्रमुख और पंचायत समिति सदस्यों में से प्रधान का चुनाव होना है। ऐसे में जिला प्रमुख और प्रधान की कुर्सी पर नजर रखने वाले दावेदार भी अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं।
भाजपा और कांग्रेस इस बार टिकटों की घोषणा आखिरी समय तक रोकने की रणनीति पर आगे बढ़ रही हैं।
माना जा रहा है कि 11 और 12 अक्टूबर के आसपास अधिकांश टिकटों की घोषणा हो सकती है। जिन सीटों पर पार्टी के भीतर दावेदारों के बीच ज्यादा खींचतान है, वहां उम्मीदवार का नाम सार्वजनिक करने के बजाय सीधे निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पार्टी का चुनाव चिह्न जमा कराने की रणनीति भी अपनाई जा सकती है।
शहरी निकाय चुनावों में भी दोनों प्रमुख दलों ने कई जगह इसी तरह अंतिम समय में प्रत्याशियों के नाम सामने लाकर बगावत और भीतरघात को नियंत्रित करने का प्रयास किया था। अब पंचायत चुनाव में भी पार्टियां इसी फार्मूले को आजमाने की तैयारी में हैं।
राजस्थान के पंचायतीराज चुनावों में करीब 1.69 लाख नए जनप्रतिनिधि चुने जाएंगे। महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण होने के कारण बड़ी संख्या में महिलाएं भी पंचायतीराज संस्थाओं में नेतृत्व की भूमिका में आएंगी।
14,403 ग्राम पंचायतों में करीब 7,200 महिला सरपंच और लगभग 65 हजार महिला वार्ड पंच चुने जाने हैं। वहीं 457 पंचायत समितियों में से 221 प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
इस बार पंचायतीराज चुनाव पिछले चुनावों की तुलना में बड़े स्तर पर हो रहे हैं। पिछले चुनाव तक प्रदेश में 33 जिला परिषद थीं, जबकि अब 41 जिला परिषदों में चुनाव होंगे। इसी तरह पंचायत समितियों की संख्या भी 352 से बढ़कर 457 हो गई है।
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के बाद पहले चरण में पंच और सरपंच पदों के लिए नामांकन प्रक्रिया 23 अक्टूबर से शुरू होगी।
चुनाव कार्यक्रम के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू है। इसके चलते सरकार नई योजनाओं और ऐसे नए कार्यक्रमों की घोषणा नहीं कर सकेगी, जिनसे मतदाताओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना हो। पहले से स्वीकृत और प्रक्रिया में चल रहे कार्य निर्धारित नियमों के तहत जारी रह सकेंगे।
नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही अब गांवों की चौपालों से लेकर राजनीतिक दलों के कार्यालयों तक दावेदारों की सक्रियता बढ़ने लगी है। असली सियासी तस्वीर हालांकि भाजपा और कांग्रेस की टिकट सूची सामने आने के बाद ही साफ होगी। फिलहाल दोनों दलों के दावेदार टिकट के लिए जोर लगा रहे हैं और पार्टियां जीत की संभावना के साथ-साथ संभावित बगावत को भी ध्यान में रखकर प्रत्याशियों के नाम तय करने में जुटी हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित